पिछले दिनों पटना में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के सुप्रीमो और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी के राज्य अधिवेशन में महत्वपूर्ण संगठनात्मक फैसले लेते हुए आगामी राजनीतिक रणनीति का स्पष्ट खाका खींचा। इसी अधिवेशन के दौरान उन्होंने आलोक सिंह को RLM का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करने की घोषणा की, जो पार्टी के विस्तार और मजबूती की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस महत्वपूर्ण नियुक्ति के साथ ही, कुशवाहा ने प्रशांत पंकज और सुभाष चंद्रवंशी को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी, जबकि हिमांशु पटेल को प्रधान महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त कर संगठन को नई ऊर्जा देने का प्रयास किया। इन नियुक्तियों के पीछे पार्टी को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय एवं प्रभावी बनाने का उद्देश्य बताया गया।
अधिवेशन को संबोधित करते हुए, उपेंद्र कुशवाहा कुछ मौकों पर भावुक भी नजर आए, विशेषकर तब जब उन्होंने विधान परिषद चुनाव में अपने बेटे को सीट न दिए जाने के मुद्दे पर अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने खुलासा किया कि इस संबंध में उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर भी शीर्ष नेतृत्व से बात की थी, लेकिन इसके बावजूद फैसला उनके पक्ष में नहीं आया, जिससे उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं में निराशा का भाव देखा गया। यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर और NDA के साथ संबंधों को लेकर विभिन्न अटकलों को जन्म दे रहा है।
NDA छोड़ने की अटकलों पर RLM प्रमुख का बड़ा बयान
इसी बीच, RLM प्रमुख ने मीडिया के एक वर्ग पर तीखा हमला बोलते हुए उन खबरों को सिरे से खारिज किया, जिनमें पिछले कई महीनों से RLM के NDA से अलग होने या किसी अन्य दल में विलय की अटकलें लगाई जा रही थीं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिना किसी ठोस तथ्य या प्रमाण के ऐसी खबरें चलाना पत्रकारिता के सिद्धांतों के विपरीत है और यह पूरी तरह से गलत है। कुशवाहा ने जोर देकर कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत राष्ट्रीय लोक मोर्चा का किसी अन्य दल में विलय नहीं करा सकती, यह एक स्वतंत्र और सशक्त राजनीतिक इकाई बनी रहेगी।
उपेंद्र कुशवाहा ने किया NDA में बने रहने का ऐलान
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए, उपेंद्र कुशवाहा ने उन्हें आश्वस्त किया कि RLM राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का अटूट हिस्सा है और हमेशा रहेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की, “राष्ट्रीय लोक मोर्चा NDA में थी, है और आगे भी NDA में ही रहेगी। हम कहीं और जाने वाले नहीं हैं।” उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से भावुक अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या निराधार खबर पर बिना पूरी जांच-पड़ताल किए भरोसा न करें, क्योंकि ऐसी खबरें पार्टी को कमजोर करने का एक षड्यंत्र हो सकती हैं।
नए पदाधिकारियों की घोषणा करते हुए, कुशवाहा ने एक बार फिर दोहराया कि ये सभी संगठनात्मक बदलाव पार्टी को और अधिक मजबूत बनाने तथा उसकी पहुंच को व्यापक बनाने के उद्देश्य से किए गए हैं। उन्होंने नवनियुक्त पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे पार्टी का विस्तार करें और अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ें, ताकि आगामी चुनावों में RLM एक निर्णायक भूमिका निभा सके। इस पूरे अधिवेशन के दौरान, बड़ी संख्या में RLM कार्यकर्ता उपस्थित थे, जिन्होंने उपेंद्र कुशवाहा के हर संबोधन और फैसले का भरपूर समर्थन किया, जो पार्टी के प्रति उनकी गहरी निष्ठा को दर्शाता है।






