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पंचायत सचिवों की हड़ताल पर बिहार सरकार का कड़ा रुख, वेतन कटौती की दी चेतावनी

Written by:Banshika Sharma
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बिहार में पंचायत सचिवों की हड़ताल पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। दरअसल बिना शर्त काम पर लौटने का फरमान जारी हो गया, नहीं तो 'नो वर्क नो पे' के तहत वेतन कटौती की जाएगी।
पंचायत सचिवों की हड़ताल पर बिहार सरकार का कड़ा रुख, वेतन कटौती की दी चेतावनी

बिहार के ग्रामीण अंचलों में विकास की गति को सुचारु रखने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, वे पिछले एक माह से अधिक समय से अपने कार्यक्षेत्र से दूर हैं। ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ माने जाने वाले पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने राज्य के ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले आवश्यक कार्यों की रफ्तार थम सी गई है, जिससे आम जनजीवन पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। जनहित के महत्वपूर्ण कार्य जैसे जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीकरण, विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक लाभ पहुँचाना और स्थानीय विकास परियोजनाएं, सभी इस हड़ताल के कारण ठप पड़ गए हैं। इसी गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में अब सरकार ने एक सख्त फरमान जारी किया है।

दरअसल पंचायती राज विभाग ने बीते बुधवार, 13 मई, 2026 को एक स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए हड़ताली पंचायत सचिवों से बिना किसी शर्त के तत्काल कार्य पर लौटने को कहा है। विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि वे तुरंत बिना किसी शर्त के हड़ताल से वापस आते हैं, तो उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल करते हुए नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा। यह एक तरह से अपील भी है और चेतावनी भी, जिसमें विभाग ने गतिरोध को समाप्त करने के लिए एक नरम और कड़ा दोनों रुख अपनाया है।

विभाग पंचायत सचिवों की मांगों पर विचार कर रहा

विभाग के सचिव मनोज कुमार ने हड़ताल पर गए पंचायत सचिवों से अपील करते हुए कहा कि वे अविलंब कार्य पर लौट आएं, ताकि ग्राम पंचायत स्तर पर जनहित एवं विकास से जुड़े कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि विभाग पंचायत सचिवों की मांगों पर विचार कर रहा है, लेकिन इसके लिए सबसे पहले उन्हें अपनी हड़ताल खत्म करनी होगी। यह स्थिति कुछ ऐसी है, जैसे किसी महत्वपूर्ण उत्सव से पहले सभी तैयारियों का रुक जाना, जिससे उत्सव का रंग फीका पड़ने लगे और फिर आयोजकों द्वारा सभी को एकजुट होकर काम पर लौटने की गुहार लगाई जाए।

‘नो वर्क नो पे’ का नियम लागू किया जाएगा

दूसरी ओर, विभाग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि पंचायत सचिव इस फरमान को नहीं मानते हैं और कार्य पर नहीं लौटते हैं, तो उन पर ‘नो वर्क नो पे’ का नियम लागू किया जाएगा। इसका सीधा अर्थ है कि हड़ताल की अवधि का वेतन काट लिया जाएगा। यह एक ऐसा कदम है, जो कर्मचारियों पर वित्तीय दबाव डालकर उन्हें काम पर लौटने के लिए मजबूर कर सकता है। विभागीय गलियारों में इस चेतावनी के बाद हलचल तेज हो गई है कि क्या पंचायत सचिव संघ अपनी मांगों पर अड़ा रहेगा या सरकार के इस सख्त रुख के सामने झुकेगा।

कामकाज बाधित हो रहा

इस बीच, पंचायती राज विभाग ने एक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है। विभाग ने पाया है कि कुछ जिलों में पंचायत सचिवों के कार्यों के निष्पादन के लिए अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे कामकाज और भी बाधित हो रहा है। इस संबंध में सभी जिला पदाधिकारियों को फिर से निर्देश जारी किया गया है कि वे अपने-अपने जिले में अनुपस्थित रहने वाले या हड़ताल पर गए पंचायत सचिवों के कार्यों के निष्पादन के लिए शीघ्र वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें। यह कदम यह दर्शाता है कि सरकार ग्रामीण स्तर पर कामकाज को पूरी तरह से ठप नहीं पड़ने देना चाहती और इसके लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

बता दें कि बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ की ओर से 08 अप्रैल 2026 से पंचायत सचिवों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की सूचना विभाग को पहले ही दी गई थी। उनकी मांगों में गृह जिले में पोस्टिंग, ग्रेड पे बढ़ाने और यात्रा भत्ता देने जैसी महत्वपूर्ण चीजें शामिल हैं। तब से लेकर अब तक, पंचायतों में कामकाज पूरी तरह से रुक गए थे, जिससे आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। अब देखना होगा कि विभाग की ओर से की गई इस अपील और चेतावनी के बाद पंचायत सचिव हड़ताल खत्म कर लौटते हैं या नहीं, क्योंकि इस निर्णय पर राज्य के ग्रामीण विकास का भविष्य काफी हद तक निर्भर करता है।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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