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भूमि सुधार संवाद में बड़ा फैसला, दखल-कब्जा से दूर रहेगी पुलिस, राजस्व सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन

Written by:Shyam Dwivedi
Published:
दरभंगा में आयोजित 'भूमि सुधार जन कल्याण संवाद' में सैकड़ों शिकायतों का मौके पर निपटारा किया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पुलिस अब भूमि विवादों में हस्तक्षेप नहीं करेगी और फर्जी दस्तावेजों पर FIR दर्ज करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
भूमि सुधार संवाद में बड़ा फैसला, दखल-कब्जा से दूर रहेगी पुलिस, राजस्व सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन

दरभंगा: जिले में आयोजित ‘भूमि सुधार जन कल्याण संवाद’ में भूमि से जुड़े सैकड़ों मामलों की सुनवाई हुई और उनके त्वरित समाधान के लिए ठोस निर्देश जारी किए गए। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि सबसे बड़ा फैसला यह लिया गया कि पुलिस अब किसी भी परिस्थिति में जमीन पर दखल-कब्जा दिलाने या निर्माण कार्य में हस्तक्षेप नहीं करेगी। इसे पूरी तरह से राजस्व और न्यायिक प्रक्रिया का विषय बताया गया है।

जिले के सभी अंचलों से आए आवेदकों की समस्याओं को विभाग के वरीय पदाधिकारियों, अपर समाहर्ता, और अंचलाधिकारियों की मौजूदगी में सुना गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि निर्देशों का उल्लंघन करने वाले पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस संवाद का उद्देश्य भूमि विवादों का पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से निपटारा करना है।

राजस्व सेवाएं अब पूरी तरह डिजिटल

वहीं, प्रशासन ने भूमि संबंधी सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन करने की जानकारी दी। अब पारिवारिक बंटवारे के बाद सभी हिस्सेदारों का एक साथ दाखिल-खारिज ‘पारिवारिक बंटवारा पोर्टल’ के माध्यम से किया जा सकेगा। इसके अलावा, 1 जनवरी से दस्तावेजों की सत्यापित नकल (Verified Copy) केवल ऑनलाइन ही उपलब्ध है।

आम लोगों के लिए प्रक्रिया हुई आसान

शिकायतों के लिए एक केंद्रीकृत व्यवस्था भी बनाई गई है। कॉल सेंटर का नंबर 1800 3456 215 अब सीधे जन शिकायत पोर्टल से जोड़ दिया गया है, ताकि लोगों की शिकायतें आसानी से दर्ज हो सकें। विभाग ने कहा कि जल्द ही एक और नंबर जारी किया जाएगा, जिससे फोन न लगने की समस्या भी दूर होगी।

इसके अतिरिक्त, पुराने कैथी लिपि के दस्तावेजों के अनुवाद के लिए 29 विशेषज्ञों का एक पैनल बनाया गया है। यह सुविधा 220 रुपये प्रति पृष्ठ की दर पर उपलब्ध होगी। एक और महत्वपूर्ण कदम के तहत राजस्व न्यायालयों को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है, जिससे अब आम नागरिक बिना वकील के भी अपना पक्ष रख सकते हैं।

सरकार ने इस पहल को सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है, जिसका लक्ष्य हर बिहारवासी की भूमि से जुड़ी समस्या का न्यायपूर्ण समाधान करना है।