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Explainer: बिहार के शाहाबाद में हारी हुई बाजी को कैसे पलटेगी BJP? 22 सीटों के लिए विशेष ‘प्लान

Written by:Deepak Kumar
Published:
बिहार के शाहाबाद में 2020 में एनडीए सिर्फ 2 सीट जीत पाया था। BJP ने अब स्थानीय नेताओं को कार्य समिति और प्रदेश कमेटी में जगह देकर, कुशवाहा वोट बैंक को साधकर, विकास योजनाओं और प्रधानमंत्री कार्यक्रमों का जोर देकर 22 सीटों में हार पलटने की रणनीति बनाई है।
Explainer:  बिहार के शाहाबाद में हारी हुई बाजी को कैसे पलटेगी BJP? 22 सीटों के लिए विशेष ‘प्लान

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के लिए शाहाबाद क्षेत्र सबसे कमजोर कड़ी साबित हो रहा है। शाहाबाद में भोजपुर, बक्सर, रोहतास और कैमूर जिले आते हैं। पहले यह क्षेत्र बीजेपी और एनडीए का मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन 2020 और 2024 के चुनावों में यहां करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। इसे फिर से मजबूत करने के लिए बीजेपी ने बड़ी संख्या में स्थानीय नेताओं को कार्य समिति और प्रदेश कमेटी में जगह दी। आयोगों में भी वहां के नेताओं को तरजीह दी गई है, ताकि 2020 जैसी स्थिति दोबारा न आए।

2020 में सिर्फ दो सीटों पर जीत

शाहाबाद क्षेत्र एनडीए का गढ़ रहा है, लेकिन 2015 से हालात बदलने लगे। 2015 में नीतीश कुमार और लालू यादव के गठबंधन से बीजेपी की जमीन कमजोर हुई। 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू के साथ गठबंधन होने के बावजूद 22 सीटों में से सिर्फ 2 सीटें बीजेपी के खाते में गईं। भोजपुर की 7 सीटों में 2 पर एनडीए और 5 पर महागठबंधन ने जीत हासिल की। बक्सर, रोहतास और कैमूर में एनडीए का खाता भी नहीं खुला।

2024 लोकसभा चुनाव में भी हार

2024 के लोकसभा चुनाव में शाहाबाद क्षेत्र की चारों सीटें महागठबंधन के पक्ष में चली गईं। आरा से केंद्रीय मंत्री आरके सिंह, काराकाट से उपेंद्र कुशवाहा, बक्सर से मिथिलेश तिवारी और सासाराम से शिवेश राम हार गए। महागठबंधन के बागी विधायक भी लोकसभा चुनाव में बेअसर साबित हुए। इससे बीजेपी की चिंता बढ़ गई कि क्या ये विधायक विधानसभा चुनाव में अपनी सीट बचा पाएंगे।

शाहाबाद की जमीन मजबूत करने की बीजेपी रणनीति

बीजेपी ने इस क्षेत्र में स्थानीय नेताओं को अधिक महत्व दिया। शाहाबाद क्षेत्र के 105 लोगों को प्रदेश कार्य समिति में जगह दी गई और प्रदेश स्तर के संगठन में भी वहां के नेताओं को तवज्जो दी गई। दलित समाज से आने वाले शिवेश राम को महामंत्री, चिराग पासवान के टिकट पर लड़े राजेंद्र सिंह को उपाध्यक्ष बनाया गया। आरा से संतोष पाठक, पूनम रविदास, त्रिविक्रम सिंह, संतोष रंजन, मनोज सिंह और अजय यादव को प्रदेश मंत्री बनाया गया।

कुशवाहा वोट बैंक को साधने की कोशिश

लोकसभा चुनाव में कुशवाहा वोट एनडीए से छिटक गया था, जिससे काराकाट और आरा में हार मिली। पिछले एक साल से बीजेपी, जेडीयू और उपेंद्र कुशवाहा इस इलाके में कुशवाहा समाज को साधने की कोशिश में लगे हैं। जेडीयू ने भगवान सिंह कुशवाहा को विधान पार्षद बनाया, जबकि चर्चा है कि उपेंद्र कुशवाहा को इस बार विधानसभा चुनाव लड़ने को कहा गया है।

विकास और बड़े नेताओं के योगदान पर भरोसा

बीजेपी का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम और क्षेत्र में कई बड़ी सौगातों से स्थिति बदल चुकी है। श्रम संसाधन मंत्री संतोष सिंह सक्रिय हैं, जिससे चुनाव में लाभ मिलने की उम्मीद है। प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि शाहाबाद में विकास की गंगा बह रही है और प्रदेश संगठन और सरकार में इस क्षेत्र को महत्व दिया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय

विश्लेषक संजय कुमार का कहना है कि शाहाबाद में एनडीए की हार का कारण टिकट बंटवारे में संतुलन न होना और पुराने नेताओं को बेटिकट करना था। महागठबंधन के बागी विधायकों के आने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी रही। उनके अनुसार इस बार विशेष रणनीति बनाकर ही एनडीए शाहाबाद में सफलता हासिल कर सकता है।