
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियां जोरों पर हैं। सभी दल अपनी-अपनी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। राज्य के 9 प्रमंडलों में से सारण, पटना और मगध प्रमंडल एनडीए के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं, क्योंकि 2020 में इन इलाकों में महागठबंधन का दबदबा था। इन तीन प्रमंडलों की 93 सीटों में से 65 पर विपक्ष का कब्जा है। वहीं तिरहुत, दरभंगा, पूर्णिया, मुंगेर और कोसी प्रमंडल में एनडीए का प्रदर्शन बेहतर रहा, जहां 150 में से 99 सीटों पर जीत मिली थी।
कोसी प्रमंडल में एनडीए को बढ़त
कोसी प्रमंडल में सुपौल, मधेपुरा और सहरसा जिले शामिल हैं, जहां कुल 13 विधानसभा सीटें हैं। यह इलाका हमेशा सियासी चर्चा में रहता है। यहां यादवों की सबसे ज्यादा आबादी है, उसके बाद राजपूत और अति पिछड़े वर्ग के मतदाता चुनाव परिणाम तय करते हैं। जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री विजेंद्र यादव लगातार आठ बार सुपौल से जीतते आ रहे हैं।
मधेपुरा में कौन मजबूत?
मधेपुरा जिले में चार सीटें हैं। दो पर एनडीए और दो पर महागठबंधन का कब्जा है। जेडीयू के पास आलमनगर और बिहारीगंज सीट, जबकि आरजेडी के पास सिंहेश्वर और मधेपुरा सीट है। यादव वोट बैंक यहां निर्णायक भूमिका निभाता है।
सुपौल में कौन ताकतवर?
सुपौल जिले की पांचों सीटें एनडीए के पास हैं। जेडीयू के पास निर्मली, पिपरा, सुपौल और त्रिवेणीगंज, जबकि बीजेपी के पास छातापुर सीट है। यादव, अति पिछड़ा और राजपूत वोटर यहां मजबूत हैं। दलित वोटर भी अहम भूमिका निभाते हैं।
सहरसा में किसका दबदबा?
सहरसा जिले की चार सीटों में तीन एनडीए और एक महागठबंधन के पास है। बीजेपी के पास सहरसा, जेडीयू के पास सोनवर्षा और महिषी, जबकि आरजेडी के पास सिमरी बख्तियारपुर सीट है। ब्राह्मण, मुस्लिम, दलित और बनिया वोट बैंक यहां अहम है।
भागलपुर प्रमंडल में समीकरण
भागलपुर में सात सीटें हैं। बीजेपी के पास बिहपुर, पीरपैंती और कहलगांव, जेडीयू के पास गोपालपुर और सुल्तानगंज, कांग्रेस के पास भागलपुर और आरजेडी के पास नाथनगर सीट है।
बांका में किसकी पकड़ मजबूत?
बांका जिले की पांच सीटों में जेडीयू के पास अमरपुर, बेलहर, बीजेपी के पास बांका सदर और कटोरिया, जबकि आरजेडी के पास धोरैया सीट है। यादव, कुशवाहा, राजपूत, दलित और आदिवासी वोट निर्णायक हैं।
सिवान में महागठबंधन को बढ़त
सिवान जिले की आठ सीटों में से छह पर महागठबंधन का कब्जा है। आरजेडी ने सिवान, रघुनाथपुर और बड़हरिया, सीपीआई माले ने जीरादेई और दरौली, कांग्रेस ने महाराजगंज सीट जीती। बीजेपी ने दरभंगा और गोरियाकोठी पर जीत दर्ज की।
गोपालगंज में बीजेपी का दबदबा
गोपालगंज जिले की छह सीटों में एनडीए के पास चार और महागठबंधन के पास दो सीटें हैं। बीजेपी ने बरौली और गोपालगंज, जेडीयू ने कुचायकोट और भोरे, जबकि आरजेडी ने बैकुंठपुर और हथुआ पर जीत दर्ज की।
पूर्णिया प्रमंडल में एआईएमआईएम का असर
पूर्णिया जिले में सात सीटें हैं। एनडीए के पास चार, कांग्रेस के पास एक और एआईएमआईएम के पास दो सीटें हैं। अररिया जिले में छह सीटों में चार एनडीए, एक कांग्रेस और एक एआईएमआईएम को मिली। किशनगंज जिले में महागठबंधन और एआईएमआईएम ने दो-दो सीटें जीतीं। कटिहार जिले में एनडीए को चार और महागठबंधन को तीन सीटें मिलीं।
दरभंगा प्रमंडल में एनडीए की मजबूत पकड़
दरभंगा जिले की दस सीटों में से नौ एनडीए और एक महागठबंधन के पास है। समस्तीपुर जिले की दस सीटों में दोनों गठबंधन को पांच-पांच सीटें मिलीं। मधुबनी जिले की दस सीटों में आठ एनडीए और दो महागठबंधन के पास हैं।
मुंगेर प्रमंडल का समीकरण
मुंगेर प्रमंडल में छह जिले आते हैं। मुंगेर जिले की तीन सीटों में दो एनडीए और एक महागठबंधन के पास है। यादव, कुशवाहा, भूमिहार और मुस्लिम वोटर यहां निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
जहानाबाद में भी विपक्ष का दबदबा
जहानाबाद जिले में तीन विधानसभा की सीटें हैं. तीनों महागठबंधन के पास है. जहानाबाद और मखदुमपुर में आरजेडी को जीत मिली थी, जबकि सीपीआई माले ने घोसी पर कब्जा जमाया. जहानाबाद में यादव, भूमिहार और अति पिछड़ा वोट बैंक चुनाव में बड़ी भूमिका निभाता है. सेम
बेगूसराय में महागठबंधन को बढ़त
बेगूसराय जिले की सात विधानसभा सीटों में से चार पर महागठबंधन और तीन पर एनडीए का कब्जा है। भाजपा ने बछवारा और बेगूसराय, लोजपा ने मटिहानी (अब जेडीयू) सीट जीती थी। आरजेडी के पास चेरिया बरियारपुर, साहेबपुर कमाल, भाकपा के पास बखरी और तेघरा सीट है। भूमिहार, यादव, दलित और मुस्लिम मतदाता यहां निर्णायक हैं।
खगड़िया में बराबरी का मुकाबला
खगड़िया जिले की चार सीटों में एनडीए और महागठबंधन के पास दो-दो सीटें हैं। जेडीयू के पास परबत्ता और बेलदौर, आरजेडी के पास अलौली और कांग्रेस के पास खगड़िया सीट है। यादव, भूमिहार, दलित, कुशवाहा और मुस्लिम मतदाता चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं।
लखीसराय में 1-1 सीट
लखीसराय जिले की दो सीटों में बीजेपी ने लखीसराय और आरजेडी ने सूर्यगढ़ा जीती थी, पर आरजेडी विधायक एनडीए में शामिल हो गए। यादव और भूमिहार वोटरों का प्रभाव है।
शेखपुरा में बराबरी
शेखपुरा की दो सीटों में जेडीयू के पास बरबीघा और आरजेडी के पास शेखपुरा है।
जमुई में एनडीए का कब्जा
जमुई जिले की चार सीटों में बीजेपी के पास जमुई, जेडीयू के पास झाझा, हम के पास सिकंदरा और निर्दलीय के पास चकाई (जेडीयू समर्थित) है।26 सीटों में महागठबंधन के पास 20 और एनडीए के पास छह सीटें हैं।
गया जिले में कुल 10 सीटें हैं, जिनमें बीजेपी ने गया टाउन और वजीरगंज, हम पार्टी ने इमामगंज, बाराचट्टी और टिकारी पर कब्जा किया। आरजेडी के पास शेरघाटी, गुरुवा, बोधगया, बेलागंज और अत्री सीटें हैं। अरवल जिले में दो सीटें हैं, जिनमें कुर्था पर आरजेडी और अरवल पर सीपीआई माले का कब्जा है। जहानाबाद जिले की तीन सीटों में जहानाबाद और मखदुमपुर पर आरजेडी, जबकि घोसी पर सीपीआई माले जीती। तीनों जिलों में जातीय समीकरण जीत-हार में अहम भूमिका निभाते हैं।
औरंगाबाद में महागठबंधन का दबदबा
औरंगाबाद जिले की 6 सीटों पर महागठबंधन का कब्जा है। आरजेडी ने गोह, ओबरा, नबीनगर, रफीगंज जीता, जबकि कांग्रेस ने कुटुंबा और औरंगाबाद पर। राजपूत, यादव, कुशवाहा, मुस्लिम और दलित वोट अहम भूमिका निभाते हैं।
नवादा में महागठबंधन मजबूत
नवादा की 5 सीटों में से 4 महागठबंधन के पास (रजौली, नवादा, गोविंदपुर – आरजेडी; हिसुआ – कांग्रेस) और 1 एनडीए (वारिसलीगंज – बीजेपी) के पास। यादव, मुस्लिम और अति पिछड़ा वोट अहम।
पटना प्रमंडल में महागठबंधन मजबूत
पटना प्रमंडल की 43 सीटों में 30 महागठबंधन और 13 एनडीए के पास। पटना जिले में 9 महागठबंधन और 5 एनडीए (उपचुनाव बाद 7) सीटें। नालंदा में 6 एनडीए और 1 महागठबंधन। भोजपुर में 5 महागठबंधन और 2 एनडीए। बक्सर में सभी 4 महागठबंधन के पास। रोहतास की 7 सीटों पर भी महागठबंधन का कब्जा।
कैमूर में महागठबंधन का दबदबा
कैमूर की चार सीटों पर महागठबंधन ने जीत हासिल की। रामगढ़, मोहनिया और भभुआ पर आरजेडी ने जीत दर्ज की, जबकि चैनपुर बसपा के पास रही, बाद में विधायक जेडीयू में शामिल हो गए। उपचुनाव में रामगढ़ और मोहनिया पर एनडीए की बढ़त हो गई। राजपूत, यादव, दलित और मुस्लिम वोट निर्णायक हैं।
तिरहुत में एनडीए का दबदबा
तिरहुत प्रमंडल में 49 सीटों में से 33 एनडीए और 16 महागठबंधन के पास। यह प्रमंडल एनडीए का गढ़ माना जाता है। जातीय समीकरण में बनिया, यादव, राजपूत, दलित और मुस्लिम वोट अहम भूमिका निभाते हैं।
पश्चिम चंपारण में एनडीए मजबूत
9 सीटों में 8 एनडीए और 1 माले के पास। भाजपा के पास 7 सीटें, जदयू के पास कोई नहीं। दलित, यादव और बनिया वोट निर्णायक।
पूर्वी चंपारण में एनडीए आगे
12 सीटों में 9 एनडीए और 3 महागठबंधन के पास। भाजपा के पास 8, जदयू के पास 1 और राजद के पास 3 सीटें। जातीय समीकरण में बनिया, यादव, राजपूत, दलित और मुस्लिम वोट अहम।
