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‘बिहार की अस्मिता का अपमान’, तेजस्वी यादव की रैली में पीएम मोदी पर टिप्पणी से गरजे गिरिराज सिंह

Written by:Deepak Kumar
Published:
‘बिहार की अस्मिता का अपमान’, तेजस्वी यादव की रैली में पीएम मोदी पर टिप्पणी से गरजे गिरिराज सिंह

बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। वैशाली जिले के महुआ में आयोजित तेजस्वी यादव की सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक तूफान में बदल गई। केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय सांसद गिरिराज सिंह ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे बिहार की अस्मिता का अपमान बताया।


गिरिराज सिंह ने साधा राजद पर निशाना

गिरिराज सिंह ने कहा कि बिहार की राजनीति में यह कोई नई बात नहीं है, लेकिन यह बेहद शर्मनाक है कि फिर से मंच से प्रधानमंत्री की मां पर अपशब्द कहे गए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह वही मानसिकता है जो 1990 के दशक के जंगलराज की पहचान रही है और आज भी राजद नेताओं के व्यवहार में दिखाई देती है। सिंह ने कहा कि यह केवल नरेंद्र मोदी की मां का नहीं, बल्कि पूरे बिहार और देश की मातृशक्ति का अपमान है।


कार्यकर्ताओं से अपशब्द दिलवाना गलत: गिरिराज

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले राहुल गांधी के मंच से प्रधानमंत्री की मां के खिलाफ अपशब्द बोले गए थे और अब तेजस्वी यादव के मंच से भी वही हुआ। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि जंगलराज के संस्कार आज भी जीवित हैं। गिरिराज सिंह ने कहा कि यह अपमान केवल एक परिवार का नहीं बल्कि हर भारतीय मां का है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंच से ऐसे नारे लगे तो तेजस्वी यादव क्यों चुप रहे?


चुनाव में मिलेगा जवाब

गिरिराज सिंह ने आगे कहा कि यह घटना किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि पूरे समाज की मातृशक्ति का अपमान है। बिहार की जनता इस बेइज्जती को कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव में जनता इसका जवाब जरूर देगी और राजद को इसकी कीमत चुकानी होगी। भाजपा और जदयू पहले ही इस मुद्दे को बड़ा बनाकर चुनावी मैदान में उतार चुके हैं और इसे जनता के सामने जोर-शोर से उठाया जा रहा है।


विपक्ष के लिए चुनौती

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना से राजद को नुकसान हो सकता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो पर लोग नाराजगी जता रहे हैं। भाजपा और जदयू इसे चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। इधर, विपक्षी दलों का कहना है कि नेताओं को अपने मंचों पर अनुशासन बनाए रखना चाहिए और किसी भी आपत्तिजनक टिप्पणी को तुरंत रोकना चाहिए। महुआ की घटना ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिहार की राजनीति सभ्य संवाद की ओर बढ़ेगी या विवाद और नफरत ही हावी रहेंगे।