लॉकडाउन में महिलाओं की जिस जरूरत को भूला प्रशासन, मदद के लिए आगे आया युवा

लॉकडाउन में महिलाओं की जिस जरूरत को भूला प्रशासन, मदद के लिए आगे आया युवा

ग्वालियर।अतुल सक्सेना

अक्षय कुमार(akshay kumar) की फिल्म पैड मेन(Padman) सबको याद होगी लेकिन उसमें दिया गया संदेश अब धीरे धीरे भूलते जा रहे हैं। लॉक डाउन(lockdown) में ही इसका उदाहरण को मिला जब किशोरियों, युवतियों और महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण जरूरत को प्रशासन ने ही भुला दिया। ये जरूरत है सेनेटरी पैड। लेकिन शहर के दो सामाजिक संगठन के युवा गाँव गाँव जाकर इस जरूरत को पूरा कर रहे हैं।

फिल्म पैड मेन में बताया गया था कि कि तरह माहवारी यानी मेन्सिस पर चर्चा करने में महिलाएं, युवतियाँ और किशोरियां संकोच करती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो अशिक्षा के अभाव में सेनेटरी पैड(sainatary pad) के इस्तेमाल की जगह तरह तरह की चीजों का प्रयोग होता है जो जानलेवा भी साबित होता है। इसलिए फिल्म में सेनेटरी पैड के इस्तेमाल पर जोर दिया गया और झिझक को मिटाने के लिए जगरूकता फैलाने की बात कही गई। लेकिन लगता है कि फिल्म की बातों का असर अब लोगों पर खत्म हो गया है तभी कोरोना महामारी में स्वच्छता और साफ सफाई का ध्यान रखने के कैंपेन में महिलाओं के लिए सबसे जरूरी इस चीज को भुला दिया गया। लेकिन ग्वालियर के युवाओं के दो सामाजिक संगठन महादेव समर्पण सेवा संस्थान और केयर एण्ड अवेयर फ़ाउंडेशन ने सेनेटरी पैड्स बाँटने की मुहिम शुरू की है । इसके लिए संस्था के सदस्यों ने सेनेटरी पैड जगह जगह से एकत्रित किए और फिर उन पैड्स को उन जरूरतमंद तक पहुँचाया जहाँ तक पहुँचाने का काम स्वास्थ्य विभाग या फिर महिला बाल विकास का था।

गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं, युवतियों और किशोरियों को स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग सेनेटरी पैड्स उपलब्ध करवाता है। लेकिन लॉक डाउन में सरकार ने इसको भुला दिया। दोनों संस्थाओं के सदस्यों ने इस जरूरत को महसूस किया और मदद करने के लिए मुहिम छेड़ दी और “standwithsainatarypad स्लोगन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर इसका वितरण शुरू कर दिया। संस्था के सदस्यों ने मिलकर लगभग 150 सेनेटरी पैड ज़रूरतमंद तक पहुंचाए हैं। सदस्यों का कहना है कि हमारी ये मुहिम जारी रहेगी।।

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