कोरोना संकटकाल के बीच आगे आए शिक्षक, इस तरह कर रहे मजदूरों की मदद

कोरोना संकटकाल के बीच आगे आए शिक्षक, इस तरह कर रहे मजदूरों की मदद

सीहोर।अनुराग शर्मा

कोरोना महामारी(corona pandemic) के प्रकोप से बड़ी संख्या में मजदूर(laborers) प्रभावित हुए हैं । लंबे लॉकडाउन(lockdown) के बाद सभी प्रवासी मजदूर अपने-अपने घरों की ओर लौट रहे हैं। जिसमें बड़ी संख्या में लोग भूखे प्यासे भी हैं। इस विकट घड़ी में मजदूर वर्ग की सहायता के लिए कुछ दिनों से प्रांतीय शिक्षक संघ के अध्यापक साथी एवं शहर के समाजसेवी मिलकर भोजन वितरण और पानी के पाउच बांट रहे हैं।

इसी कड़ी में आज पुन: सैकड़ा खेड़ी हाईवे रोड पर अपने घरों को लौट रहे मजदूर और अन्य जरूरतमंद लोगों को भोजन के पैकेट और पानी के पाउच उपलब्ध कराए। साथ ही कुछ दिनों से देखा जा रहा था कि कुछ मजदूर जिनके पैरों में किसी कारण फटी चप्पल या पैरों में पहनने का कोई अन्य साधन नहीं था। उसको देखते हुए आज अध्यापक साथियों ने अपने घरों से पुराने चप्पल एवं जूतों को एकत्र कर सैकड़ा खेड़ी रोड पर निकल रहे मजदूर वर्ग के लोगों को सभी सामान भेंट किए । इस अवसर पर सभी अध्यापक साथियों ने निर्णय लिया कि इस मदद की कड़ी को रुकने नहीं देंगे और इसको निरंतर जारी रखेंगे। आज अध्यापकों एवं समाजसेवी साथियों में संजय सक्सेना, चंद्रशेखर वर्मा ,रमेशचंद्र मेवाड़ा, सचिन तिवारी, मुकेश पाटीदार, प्रदीप नागिया, राजेंद्र परमार, दिनेश मेवाड़ा, सुरेंद्र यादव, अभिषेक भार्गव ,राजकुमार शर्मा, महेश अहिरवार आदि उपस्थित थे।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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