तो Indore में इस प्लानिंग से कम हुए Dog Biting के मामले

तो Indore में इस प्लानिंग से कम हुए Dog Biting के मामले

इंदौर।आकाश धोलपुरे

कोरोनाकाल का आगाज ऊपर से लॉक डाउन के शुरुआती दौर में शहर में कुत्तों द्वारा आम लोगो को काटने के मामले लगातार सामने आ रहे थे और अप्रैल की शुरुआत में इंदौर में प्रतिदिन सैंकड़ो मामले सामने आ रहे थे। हालांकि इसके पीछे की वजह खोजी गई तो सामने आया कि भूख से बिलखते मूक प्राणी अपनी इच्छाओं और आवश्यकताओ को जाहिर करे भी तो कैसे। लेकिन अब इंदौर डॉग बाइटिंग के मामले अस्पतालों में कम हो रहे है। जिसकी वजह है इन मूक प्राणियों से प्रेम रखने वाले भी शहर में है।

दरअसल, कोविड-19 के कहर से जूझ रही आर्थिक राजधानी इंदौर में मूकप्रणियो के बदहाल जीवन में कुछ पशु प्रेमियों ने उन रंगों से भर दिया है। जिनके बिना उनका जीवन रंगहीन हो चला था। इन दिनों इंदौर के पीपुल्स फॉर एनिमल के लगभग 50 से 60 कार्यकर्ता शहर भर के 5 हजार श्वानों को रोजाना भोजन खिला रहें हैं। एक तरफ कोरोना कॉल के कारण इंदौर बीते 50 दिनों से भी अधिक समय से लॉक डाउन है। ऐसे में 1 लाख से ज्यादा आवारा श्वानों में 5 हजार से ज्यादा व्यावसायिक/औद्योगिक क्षेत्रो में रहने वाले आवारा श्वानों के जीवन पर भोजन का संकट उठ खड़ा हो गया था। ऐसे में पीपुल्स फॉर एनिमल की इंदौर इकाई आगे आई और प्रतिदिन इन मूक प्राणियों की भूख तृप्ति हेतु भोजन प्रबंधन शुरू किया।

रोजाना शाम 5 बजे से अगले दिन अल सुबह तक समूचे इंदौर को क्षेत्रवार भोजन की आपूर्ति की इस मुहिम का नेतृत्व कर रही प्रियांशु जैन की माने तो मुहिम शुरू करने के पहले प्रतिदिन 200 से 600 डॉग बाइट के केस रिपोर्ट हो रहे थे। भोजन के अभाव में भूखे कुत्तों का स्वभाव उग्र हो रहा था, जिसके चलते डॉग बाइट के मामलों में अचानक वृद्धि दर्ज की जा रही थी। मुहिम के बाद डॉग बाइट के मामले आजकल महज 50-60 ही रिपोर्ट हो रहें है। प्रियांशु की माने तो निगम और समाजसेवी इस नेक कार्य के बकायदा उनकी टीम को सहयोग कर रहे है और निगम द्वारा हर रोज 4 हजार रोटी दी जाती है वही समाजसेवी भी मदद के लिए आये है। इसके बाद रोटी में चावल, लौकी और अंडे जैसी सामग्री मिलाकर श्वानों को परोसी जा रही है और वो बड़े चाव से इसे खा रहे है अब उनकी शारिरिक अवस्था मे भी सुधार हो रहा है।

दरअसल, कोरोना के शुरुआती फेर में फंसे आम इंसान का ध्यान इस ओर नही था लेकिन कुछ नजरे ऐसी थी जो इन मूक प्राणियों को सिमटते और सिसकते नही देखना चाहती थी लिहाजा एक जज्बे के साथ शुरू हुई मुहिम आज भी जारी है। जिससे ना सिर्फ मूक प्राणियों की भूख को मिटाया जा रहा है बल्कि कुत्तों के काटने से होने वाले रोगों से आम लोगो की रक्षा भी की जा रही है।

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