बारिश नहीं होने से किसान परेशान, सूखने लगी है फसलें, पानी का लेवल पहुंचा नीचे

बारिश नहीं होने से किसान परेशान, सूखने लगी है फसलें, पानी का लेवल पहुंचा नीचे

मंदसौर, तरुण राठौर

एक ओर जहां कोरोना का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। जिससे लोग डरे हुए। तो वहीं दूसरी ओर बरसात की लंबी खेच ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीर बड़ा दी है। क्योंकि पूरे सावन बरसात नहीं हुई है। जिसकी वजह से तालाब व जमीन के पानी का लेवल काफी नीचे पहुंच गया है। जिससे वह बहुत जल्द सुख जाएगे। यदि ये सुख जाते है तो किसानों का यह आखरी आश भी टूट जाएगी। और इसी लिए अब किसान तो किसान सामान्य लोग भी इंद्र देवता को मनाने में लगे है। इसके लिए वह उज्जैनी मना रहे है।

पर इसके बाद भी अभी तक खाली बुदा बाधि ही हुई है। यदि अब भी तेज बरखा नही होती है। तो जिले में अकाल जैसी स्थित निर्मित हो जाएगी। जबकि किसानों इस इस बार अच्छी बरसात होने की कल्पना के चलते पहले ही खेत जोत दिए थे। परंतु बारिश की इतनी लंबी खेच ने उनकी इस उम्मीद पर पानी फेरते हुए अब वह फसले सूखने लगी है। जिससे किसान तालाबो व कुए के जरिये सिचाई करके बचाने की कोशिश कर रहे है। जो अब सूखने की कगार पर पहुंच गए।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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