भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक का निधन, पार्टी में शोक लहर

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक का निधन, पार्टी में शोक लहर

कुशीनगर।

कोरोना संकटकाल (corona era) में एक के बाद एक नेताओं के निधन की खबरें आ रही है। अब भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक सुरेंद्र शुक्ल (Senior BJP leader and former MLA Surendra Shukla) का निधन हो गया है।वे काफी समय से बीमार चल रहे थे।शुक्ल पिछले कई दिनों से गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में डायलिसिस पर रखे गए थे। शुक्ल ने रविवार को गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में 67 की उम्र में अंतिम सांस ली। शुक्ल के निधन के बाद भाजपा में शोक की लहर दौड़ गई। आज सोमवार को शुक्ल का छोटी गंडक के हेतिमपुर रेंगवनिया घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।

पूर्व विधायक ने वर्ष 1987 में ग्राम प्रधान रहते हुए जिला पंचायत सदस्य का भी चुनाव जीत राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। 1989 में पडरौना सदर विधानसभा से निर्दल चुनाव लड़े थे। 1991 में भाजपा के टिकट पर सदर सीट से विधायक चुने गए। वर्ष 1989 में पडरौना विधानसभा क्षेत्र से निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर दूसरा स्थान हासिल किया था। वर्ष 1991 में भाजपा के टिकट पर पडरौना से विधायक बने। इसके बाद 1993, 1996, 2002 व 2007 में भी चुनाव लड़े, लेकिन सफलता नहीं मिली।

पूर्व विधायक के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए भाजपा कुशीनगर के जिलाध्यक्ष प्रेमचंद मिश्र ने कहा कि आजीवन कार्यकर्ताओं और आमजन के हितों की रक्षा करने वाले सर्वसुलभ, कर्मठी और जनप्रिय नेता सुरेन्द्र कुमार शुक्ल के निधन भारतीय जनता पार्टी को अपूरणीय क्षति हुई है।ईश्वर उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews