गुटखा माफिया के इन्दौर प्रशासन से कनेक्शन! कांग्रेस ने सरकार को घेरा

गुटखा माफिया के इन्दौर प्रशासन से कनेक्शन! कांग्रेस ने सरकार को घेरा

इंदौर।आकाश धोलपुरे।

शहर के पान गुटखा माफ़िया देशद्रोही किशोर वाधवानी (Pan gutkha mafia traitor Kishore Wadhwani )की गिरफ्तार के बाद इस खेल के तार अब इंदौर प्रशासन से जुड़ते नजर आ रहे है। इसका कारण इंदौर कलेक्टर (Indore Collector) द्वारा 21 मई को जारी किया एक आदेश है, जिसमें जिला प्रशासन द्वारा  नगर निगम सीमा क्षेत्र के पान मसाले होलसेलरों और फुटकर विक्रेताओं को पान मसाला व कच्चा सामान इंदौर जिले और जिले के बाहर भेजने की अनुमति दी गई है। इस आदेश के चलते इंदौर कलेक्टर सुर्खियों में आ गए है और विपक्ष ने सवाल खड़े करना शुरु कर दिए है कि  आखिर संक्रमण फैलने के बीच कलेक्टर इंदौर ने पान मसाला परिवहन व स्थानांतरण की छूट किस आधार पर दी।  क्या इसके लिए उन्होंने सरकार से परमिशन ली या फिर उनकी नाक के नीचे  बिना किसी को बताएं आदेश जारी कर दिया।

दरअसल, 233 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी और पान गुटखा माफ़िया देशद्रोही किशोर वाधवानी के बाद कई बड़े अधिकारियों पर संलिप्तता को लेकर सवाल खड़े होने लगे है। कहा जा रहा है कि किशोर वाधवानी के साथ ही अन्य आरोपितों के कॉल रिकॉर्ड में कई अधिकारियों से बार-बार बात होने के सुबूत मिले हैं।सूत्रों के अनुसार लॉकडाउन पीरियड में वाधवानी की कलेक्टर से अपने व अपने मातहतों के मोबाइल नंबरों से 48 बार बात हुई है। जिसका ब्यौरा डिपार्टमेंट के पास है। जिसके बाद अब जांच एजेंसियों ने कलेक्टर मनीष सिंह को चिट्‌ठी लिखकर पूछताछ शुरू कर दी है। पत्र में उनसे पूछा गया है कि लॉकडाउन के दौरान जब शहर में कफ्र्यू लगा था तो फिर वाधवानी के ट्रकों को आने-जाने की इजाजत क्यों मिली। वही गुटखा माफ़िया वाधवानी अपने पार्टनर्स के साथ डीआरआई की कस्टडी में है।  सबूतों के आधार पर फिलहाल मामले की जांच की जा रही है क्या प्रभाव का इस्तेमाल करके गुटखा तस्करी की गाड़ियों के पास जारी करवाए गए या फिर इसमें जिम्मेदार अधिकारियों से की भी इसमें संलिप्तता रही है। वहीँ जांच एजेंसी टैक्स चोरी के साथ टैक्स चोरी के तरीकों की जांच भी कर रही है।

कांग्रेसी नेता ने उठाये सवाल

राज्यसभा सांसद विवेक तनखा ने भी बिना मनीष सिंह का नाम लिए इस बात का जिक्र अपने ट्वीट में किया है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान बताएं कि उनके अधिकारी कोरोना से जंग लड़ रहे थे या फिर बिजनेस कर रहे थे। तन्खा के साथ साथ कई कांग्रेस नेताओं ने इंदौर प्रशासन की भूमिका पर संदेह जताया है। सोशल मीडिया पर अजय दुबे ने कांग्रेस के मीडिया प्रभारी जीतू पटवारी और कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के मनीष सिंह पर मौन रहने पर सवाल उठाए हैं।

कलेक्टर के इस आदेश पर सवाल

दरअसल, जांच एजेंसियों के हाथ कलेक्टर मनीष सिंह का 21 मई को जारी एक आदेश हाथ लगा है। इस आदेश में जिला प्रशासन द्वारा जिले की नगर निगम सीमा क्षेत्र के पान मसाले होलसेलरों और फुटकर विक्रेताओं को पान मसाला व कच्चा सामान इंदौर जिले और जिले के बाहर भेजने की अनुमति दी गई है। अलग-अलग विक्रेताओं को अलग-अलग अनुमति दी गई। अनुमति सुबह 11 से शाम 5 बजे तक की थी। आदेश के अनुसार अनुमति पान मसाला स्थानांतरण की थी। किसी भी स्थिति में पान मसाले का विक्रय और वितरण नहीं कर सकते हैं।हैरानी की बात ये है कि ये आदेश ऐसे समय में जारी किया गया जब पूरे देश में लॉकडाउन था और केंद्र और राज्य सरकार द्वारा भी गुटखा व पान मसाला उत्पादों के विक्रय पर रोक लगाई हुई है।

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