कोरोना को लेकर लोहे की दीवार नही खड़ी की जा सकती है, सावधानी ही सुरक्षा: सुलेमान

कोरोना को लेकर लोहे की दीवार नही खड़ी की जा सकती है, सावधानी ही सुरक्षा: सुलेमान

इंदौर।आकाश धोलपुरे।

मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में सोमवार को अतिरिक्त मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान ने इंदौर में मीडिया से चर्चा की। इस दौरान मो. सुलेमान ने कहा कि आईसीएमआर द्वारा जारी आंकड़े मान्य किये जायेंगे इसके अलावा किसी अन्य सोर्स द्वारा जांच/ मरीज के आंकड़े मान्य नहीं होंगे। उन्होंने इंदौर में कहा कि मानसून को लेकर प्रशासन सतर्क है और टेस्टिंग व ट्रीटमेंट के जरिये कोविड की जंग लड़ी जा रही है वही उन्होंने आम जनता से भी अपील की है कि वो डरे नही बल्कि सतर्क रहें ताकि कोरोना से लड़ा जा सके। इसके अलावा कोरोना को हराकर जंग जीत चुके मरीजो के दोबारा पॉजिटिव आने के सवाल उन्होंने कहा कि इसको लेकर वृहद स्तर पर जांच जारी है। इधर, विवाहसहित अन्य जरूरी आयोजन और शव यात्रा को लेकर उन्होंने बताया की केंद्र सरकार की गाइडलाइन का पालन इनको लेकर किया जा रहा है इसके अलावा स्थानीय स्तर पर प्रशासन भी इन मामलों को लेकर सजगता बरत सकता है। उन्होंने कहा कि किसी की मौत न हो लेकिन यदि ऐसा होता है तो शवयात्रा में शामिल 50 लोगों के स्वास्थ्य पर बन आती है क्योंकि कोरोना दौर में कोई लोहे की दीवार तो खड़ी नही हो सकती है इसलिए सावधानी ही कोरोना से सुरक्षा के लिये जरूरी है। उन्होंने कहा कि कोविड बिल्कुल भी घातक नही है लेकिन जरूरत है तो इस बात की समय रहते उसकी पहचान हो जाये ताकि सतर्कता और इलाज संभव हो सके।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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