Lockdown 5.0: अपराधियों के हौसले बुलंद, 2 करोड़ की फिरौती की मांग, फैक्ट्री उड़ाने की दी धमकी

Lockdown 5.0: अपराधियों के हौसले बुलंद, 2 करोड़ की फिरौती की मांग, फैक्ट्री उड़ाने की दी धमकी

मुरैना।संजय दीक्षित

लॉकडाउन(lockdown)  में महामारी के कारण लोगों का घरों से निकलना बंद हो गया है तो वहीं सारे कामकाज बन्द पड़े हैं। लेकिन कुछ दिन पहले असामाजिक तत्वों ने कामदगिरि फैक्ट्री पर चेतावनी देते हुए मैन गेट पर एक लेटर(letter) चस्पा किया हैं। जिसमे लिखा हुआ कि दो करोड़ रुपए दे दो नही तो फैक्ट्री को बोम्ब से उड़ा देंगे।इसकी सूचना कामदगिरि फैक्ट्री(factory) के संचालक को लगी तो सिविल लाइन थाने(civil line policestation) में आवेदन देकर कार्यवाही की मांग की।

इसके बाद सोमवार की सुबह फिर से एक धमकी भरा लेटर चस्पा किया गया हैं उसमें में भी पहले की तरह धमकी भरा लेटर लिख कर चस्पा कर दिया गया है।सूत्रों की मानो तो कुछ दिन पहले डॉग सकॉट की टीम आयी थी। जिसने काफी छानबीन की लेकिन खाली हाथ लौटना पड़ा।अगर देखा जाए तो एक तरफ लॉकडाउन चल रहा है तो वहीं कुछ लोग फिरौती मांगने के साथ ही फैक्टिर्यों को बम से उड़ाने की धमकी दे रहे हैं।

अब देखना हैं कि फैक्ट्री को बोम्ब से उड़ाने वाले व्यक्ति को पुलिस कब तक पकड़ती हैं या फिर पहले की तरह खाली हाथ लौटना पड़ेगा।इस बारे में सिविल लाइन टीआई विनय यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले एक आवेदन दिया गया था लेकिन कार्यवाही के लिए मना किया गया था।इसके बाद आज अगर कोई आवेदन आता हैं तो उक्त व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews