
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस की तीन दिनों तक चलने वाली अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बड़ी बैठक सोमवार से शुरू हो गई है। यह महत्वपूर्ण बैठक शहर के प्रसिद्ध डेली कॉलेज परिसर में आयोजित की जा रही है।
दरअसल इस बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के साथ-साथ संगठन के सभी सह सरकार्यवाह और देश के कोने-कोने से आए करीब 408 प्रमुख बड़े पदाधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। 4 नवंबर तक चलने वाली इस बैठक में आगे की रणनीति तैयार होगी।
शताब्दी वर्ष के दौरान हुआ काम
बैठक के दौरान संघ के शताब्दी वर्ष में हुए कार्यक्रमों और संगठन के विस्तार को लेकर काफी गहन मंथन किया जाएगा। संघ ने अपने काम और संगठन के फैलाव को लेकर काफी उत्साहजनक आंकड़े भी सामने रखे हैं।
अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने जानकारी दी है कि बीते एक साल में ही देश भर में संघ की 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाएं शुरू हुई हैं। अब देश भर में संघ की दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 1 लाख से भी अधिक हो चुकी है।
65 हजार से ज्यादा हिंदू सम्मेलनों का आयोजन
संघ ने अपने शताब्दी वर्ष के मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े पैमाने पर सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए थे, ताकि अधिक से अधिक लोगों को संगठन के विचारों से सीधे तौर पर जोड़ा जा सके।
इस दौरान शहरों के मोहल्लों और गांवों के स्तर पर कुल 65 हजार 660 हिंदू सम्मेलनों का सफल आयोजन किया गया। इन सम्मेलनों में आम जनता और युवाओं ने काफी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और संघ के साथ जुड़ने में अपनी बड़ी रुचि दिखाई है।
महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की योजना
आरएसएस अब अपने कार्यक्रमों में महिलाओं और नौजवानों की संख्या को और तेजी से बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए बैठक में खास रणनीति और नए-नए उपक्रमों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। पिछले कार्यक्रमों में महिलाओं की अच्छी मौजूदगी देखने को मिली थी। अब कॉलेजों, शहरों और गांवों में युवाओं को संघ से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की योजना है, ताकि छात्र और युवा वर्ग संगठन के साथ मजबूती से खड़ा हो सके।
युवाओं को नशे से दूर रखने की मुहिम
देश में तेजी से बढ़ रही नशीली दवाओं की लत और नशे के चलन को लेकर संघ की बैठकों में लगातार बड़ी चिंता जाहिर की जाती रही है। इस बार भी यह गंभीर मुद्दा बैठक की मुख्य चर्चा में शामिल है। संघ का मानना है कि युवाओं को नशे की बुरी लत से बचाना समाज के लिए बहुत जरूरी है। इसके लिए सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं की मदद से बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे, ताकि युवा सही रास्ते पर आगे बढ़ सकें।

