मन्दसौर: नगर से दूर उपार्जन केंद्र होने की वजह से किसान हो रहे है परेशान

मन्दसौर: नगर से दूर उपार्जन केंद्र होने की वजह से किसान हो रहे है परेशान

मन्दसौर।तरुण राठौर

लॉक डाउन के तहत जहां नगर सहित पूरा जिला बन्द है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने किसानों को राहत देते हुए आज से समर्थन मूल्य पर गेंहू की खरीदी शुरू कर दी। इस खरीदी के लिए नगर के बाहर स्थित जंगलो में उपार्जन केंद्र बनाए है। जिससे किसानों को काफी परेशानी हो रही है। यही कारण है कि कई केंद्रों पर खरीदी शुरू नहीं हो पाई है। क्योंकि खरीदी केंद्र नहीं मालूम होने की वजह से किसना अपना गेहूं लेकर केंद्रों पर नहीं पहुंच पाए हैं।

इसके लिए उन्होंने कई जगहों पर केंद्र के बार में पूछताछ की। जिसके बाद उन्हें केंद्र का सही पता मिल सका है। और वह अपनी फसल लेकर उपार्जन केंद्र पहुंचे है। जहां पर शारीरिक दूरियों को बनाए रखते हुए मुँह पर मास्क लगा कर खरीदी की जाएगी। इस दौरान वहां पर स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ ही प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहेंगे। जो वहां पर स्थित हम्माल ,तुलावटी,व किसान नियम का पालन कर रहे है कि नहीं उसका ध्यान रखेंगे। नियमो का पालन कराएंगे। इस लिए जिले के इन सभी केंद्रों पर हाथ धोने के लिए साबुन व पानी की व्यवस्था की है। जबकि किसानों को निर्देश दिए है कि वह अपने साथ एक ओर व्यक्ति को लेकर आए। साथ यह भी कहा है कि वह व्यक्ति बुजुर्ग व छोटा बच्चा नहीं होना चाहिए। जो दो किसान आ रहे है वह पूरी तरह से स्वस्थ्य होना चाहिए। उन्हें किसी भी प्रकार की बीमारी नही होना चाहिए।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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