मंदसौर में फंसे 154 मजदूरों को 4 बसों से घर पहुंचाया

मंदसौर में फंसे 154 मजदूरों को 4 बसों से घर पहुंचाया

मंदसौर।तरुण राठौर।

जहां लाकडाउन कर्फ्यू के चलते सारे व्यपार व्यवसाय बन्द है। साथ लोग महामारी डर की वजह से अपने आप को घरो में कैद कर लिए। ऐसे में कई मजदूर है जो रोजी रोटी कमाने के लिए अपना घर छोड़कर जहां आए थे। उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। जो पैसे उनके पास थे वह भी खत्म हो गए है। ऐसी स्थित में घर जाने के अलावा और कोई चारा नहीं है। किंतु लॉक डाउन की वजह से जिले की सारी सिमा को प्रशासन ने सील कर दिया। जिसकी वजह से परिवहन पूरी तरह से बंद है। यही मजबूरी है ये मजदूर पैदल पैदल अपने घर जा रहे है। ऐसे मजदूरों की सहायता के लिए मन्दसौर प्रशासन आया है। बताया कि जिले के गांव धमनार में मजदूरी करने वाले मजदूरों को छोड़ने के लिए जिला कलेक्टर मनोज पुष्प की ऑन लाईन परमिशन पर 4 बसों से 154 लोगो को छोडा गया।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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