नायब तहसीलदार ने दिखाया रौब, जिले में प्रवेश को लेकर चेकिंग पुलिस पर बनाया दबाव

नायब तहसीलदार ने दिखाया रौब, जिले में प्रवेश को लेकर चेकिंग पुलिस पर बनाया दबाव

गुना।विजय कुमार जोगी

कोरोना वायरस को लेकर पुलिस की सतर्कता लगातार जारी है शहर में जिले सहित अन्य राज्यों के लोगों को शहर में प्रवेश वर्जित है जिसके चलते हाईवे बिलोनिया बाईपास दो खम्मा नाके पर कैंट थाना पुलिस का चेकिंग प्वाइंट लगा हुआ है जो शिवपुरी अशोकनगर ग्वालियर आदि जिलों व अन्य राज्यों से आने वाले लोगों की सघन जांच पड़ताल करने व आवश्यक लोगों को मेडिकल जांच रिपोर्ट के बाद ही शहर में प्रवेश दिया जा रहा है।

हाईवे पुलिस पॉइंट पर चल रही चेकिंग के दौरान शिवपुरी अशोकनगर जिले के अनेकों लोगों को मेडिकल के लिए तैनात पुलिस व ट्रैफिक कर्मियों के द्वारा रोका गया हालांकि घंटों इंतजार करने के बाद मेडिकल टीम पहुंची। चेकिंग के दौरान बाईपास पर एक चार पहिया वाहन क्रमांक एमपी 32,सी,1173 जिस पर कार्यपालिक मजिस्ट्रेट लिखा हुआ था उक्त गाड़ी में ड्राइवर सहित चार लोग सवार थे जिसमें ड्राइवर ने मास्क भी नहीं पहन रखा था। तैनात पुलिस स्टाफ द्वारा जब वाहन को शहर में प्रवेश करने से रोका गया तो गाड़ी में से उतर कर एक व्यक्ति ने पुलिस कर्मियों पर अपने पद का काफी रौब झाड़ा और टीएल मीटिंग में जल्दी में जाने की बात कहकर शहर में प्रवेश करने की बात कही।

पुलिस कर्मियों पर रोब झाड़ने वाले नायब तहसीलदार का नाम उदय सिंह बताया जाता है,साहब दतिया गए थे ऐसा उन्होंने पुलिस कर्मियों को बताया,लेकिन सूत्र यह बताते हैं कि उक्त अफसर जालौन के ग्राम गोपालपुरा (उत्तर प्रदेश)ई-पास अनुमति लेकर गए थे।और गाड़ी में भी ड्राइवर सहित चार लोग सवार थे क्या चार लोगों की अनुमति ली थी नायब तहसीलदार ने?

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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