नरोत्तम का तंज, कैकेयी के बाद अब एक और मां पुत्रमोह में अपने लाड़ले को सौंपना चाहती है देश की गद्दी

नरोत्तम का तंज, कैकेयी के बाद अब एक और मां पुत्रमोह में अपने लाड़ले को सौंपना चाहती है देश की गद्दी

इंदौर, आकाश धोलपुरे| कृषि क़ानून (Farm Law) के समर्थन में आयोजित किसान सम्मलेन में गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) कांग्रेस पर जमकर बरसे| डॉ मिश्रा ने कहा कांग्रेस (Congress) भ्रम फैला रही है कि कृषि सुधार के नए कानून किसान विरोधी है| उन्होंने कहा कैकेयी के बाद अब एक और मां पुत्रमोह में पड़कर देश की गद्दी अपने लाड़ले को सौंपना चाहती है।

नरोत्तम मिश्रा ने कहा कांग्रेस के हाथ में अब सिर्फ भय और भ्रम की राजनीति ही बची है। दरअसल अब वो कोई जनांदोलन करने लायक रही ही नहीं है। कांग्रेस तो बस कथित आंदोलन के नाम पर जनता को गुमराह करने का काम करती है। उन्होंने कहा कांग्रेस देश में भ्रम फैला रही है कि कृषि सुधार के नए कानून किसान विरोधी हैं। वो स्पष्ट करे कि यदि उसकी सरकार के समय बने कानून किसान हितैषी थे तो फिर हमारे देश के अधिकांश किसान आज तक कर्ज में क्यों डूबे हैं|

गृहमंत्री मिश्रा ने निशाना साधते हुए कहा कैकेयी के बाद अब एक और मां पुत्रमोह में पड़कर देश की गद्दी अपने लाड़ले को सौंपना चाहती है। यह लोकतंत्र में उस पार्टी के लिए शर्मिंदगी की बात होनी चाहिए। जबकि भारतीय जनता पारी परिवारवाद से मुक्त लोकतांत्रिक प्रकिया से जनसेवा करने में विश्वास करती है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews