LOCKDOWNN: कोरोना संक्रमण से जागरूक करने की एक पहल ऐसी भी

LOCKDOWNN: कोरोना संक्रमण से जागरूक करने की एक पहल ऐसी भी

डिंडौरी। प्रकाश मिश्रा।

डिंडौरी में समाज सेवी दशरथ पेंटर कोरोना से बचाव के लिए सड़कों, दीवालों में स्लोगन लिख कर रहे लोगो को जागरूक
डिंडौरी जिले में कोरोना वायरस के रोक थाम के लिए लॉक डाउन के दौरान कई समाज सेवी बढ़ चढ़ कर अपने अपने तरीके से योगदान दे रहे हैं। नगर के समाजसेवी दशरथ पेंटर ने भी लॉक डाउन का पालन करने में अपना योगदान देते हुए नगर की सड़कों से लेकर दीवालों में स्लोगन पेंटिंग कर कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए प्रचार प्रसार कर आम लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है।

पेंटर एवं मूर्ति कलाकार दशरथ को यह प्रेरणा देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से मिली जो लगतार लॉकडाउन का सख्ती से पालन करने की अपील देश की जनता को संबोधित करते हुए कर रहे हैं। बता दें कि पेंटर ने लोगो को जागरूक करने के लिए शहर के प्रमुख तिराहों, चौराहों में पेंटिग कर स्लोगन लिखा है ताकि लॉक डाउन के बीच मिली ढील के दौरान जब लोग अपने घरों से निकलें तो इन स्लोगनों को पढ़ कर जागरूक हो और शासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन कर सकें।

यूं तो पुलिस प्रशासन एवं जिला प्रशासन के द्वारा लॉकडाउन का पालन कराने के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक स्वयं भी सड़कों पर उतर कर सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने की अपील आम नागरिकों से करते नजर आ रहे हैं ।इसी बीच पेंटर दशरथ का यह योगदान नियमों को पालन कराने में तथा लोगों को जागरूक करने मेंऔर अधिक कारगर साबित होगा। जिले में ऐसे समाज सेवियों के द्वारा किये जा रहे कामो की सराहना की जा रही है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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