
दीपावली की खुशियों के बीच बालाघाट शहर में पटाखों की बिक्री और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। त्यौहार के सीजन में आतिशबाजी का बाजार तो सज गया है लेकिन सुरक्षा के नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है।
दरअसल शहर के बायपास रोड पर बनी थोक पटाखा दुकानों में तय सीमा से कहीं ज्यादा पटाखों का स्टॉक जमा करके रखा गया है। चिंता की बात यह है कि इन दुकानों के बिल्कुल पास में पेट्रोल पंप, लोगों के रहने वाले मकान और कई बड़ी दुकानें मौजूद हैं, जिससे हर वक्त किसी बड़े हादसे का डर बना रहता है।
हादसों से भी नहीं लिया सबक
बालाघाट जिले में पटाखों की वजह से पहले भी कई बड़े और दर्दनाक हादसे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की नींद नहीं खुल रही है। पुराने हादसों से कोई सीख नहीं ली गई है।
जून 2017 में खैरी इलाके की एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके में 23 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी और 10 लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे। वहीं साल 2015 में किरनापुर की पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में भी 3 लोगों की जान चली गई थी। इसके बावजूद सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती जा रही है।
बायपास की थोक दुकानों में सीमा से ज्यादा बारूद
बायपास रोड पर मौजूद तीन बड़ी थोक पटाखा दुकानों में दीपावली को देखते हुए बहुत ज्यादा मात्रा में पटाखे और बारूद भरकर रखा गया है। इतने बड़े स्टॉक को देखकर आसपास के लोग भी काफी डरे हुए हैं। दरअसल थोक पटाखा एसोसिएशन के अध्यक्ष कुमार वाधवानी ने खुद यह बात मानी है कि मांग ज्यादा होने की वजह से दुकानों में अतिरिक्त स्टॉक रखा गया है। उनका कहना है कि इस बात की जानकारी प्रशासन को है और उन्होंने नियमों के मुताबिक 33 फीसदी ज्यादा स्टॉक रखने का जरूरी चालान भी जमा किया हुआ है।
पेट्रोल पंप और आबादी के पास जमा है बारूद
इस पूरे मामले में सबसे डराने वाली बात दुकानों की लोकेशन है। जहां ये पटाखे रखे गए हैं उसी के ठीक पास में पेट्रोल पंप और घनी आबादी वाले रिहायशी मकान बने हुए हैं। अगर किसी वजह से वहां छोटी सी भी आग लग जाती है तो वह पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले सकती है। सुरक्षा के नाम पर दुकानों में सिर्फ पानी-रेत की बाल्टियां और कुछ छोटे-मोटे सिलेंडर रखे नजर आते हैं।
कुमार वाधवानी, अध्यक्ष, थोक पटाखा एसोसिएशन
गोपाल सोनी, एसडीएम

