पुलिस ने दिखाई सख्ती के साथ हमदर्दी भी, कोरोना राहतकोष में दिए लगभग 80 हजार रूपए

पुलिस ने दिखाई सख्ती के साथ हमदर्दी भी, कोरोना राहतकोष में दिए लगभग 80 हजार रूपए

अलीम डायर। अशोकनगर।

कोरोना वायरस(corona virus) के चलते संपूर्ण भारत में 24 मार्च से लॉक डाउन जारी है। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सरकार द्वारा सभी देशवासियों से घर पर ही रहने की अपील की गई है। इस दौरान सामाजिक संस्थाएं एवं समाजसेवियों की ओर से गरीब मजदूर और निर्धन लोगों के लिए खाने पीने की कई सुविधाएं दी जा रही हैं तो वही मुंगावली तहसील में भी समाजसेवी द्वारा गरीब मजदूर और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए कच्चे राशन पानी की व्यवस्था की जा रही है जिसमें नगर के सभी वरिष्ठ और गणमान्य लोगों ने अपना योगदान दिया है।

इसी क्रम में कोरोना वायरस जैसी महामारी(pandemic) मैं लॉक डाउन के दौरान जहां पुलिस प्रशासन और जिले का पूरा पुलिस स्टाफ दिन रात ड्यूटी(duty) पर तैनात होकर जनता की सेवा में लगे हैं जिसका परिणाम यह है कि अभी तक जिले में एक भी कोरोना पॉजिटिव(positive) मरीज नहीं है। पुलिस प्रशासन की सख्ती के साथ पुलिस प्रशासन का एक मानवीय चेहरा भी सामने आया है जिसमें मुंगावली पुलिस प्रशासन एसडीओपी श्वेता गुप्ता थाना प्रभारी रोहित दुबे एवं समस्त पुलिस स्टाफ के सहयोग से कोरोना राहत कोष में लगभग 80 हजार रूपए दिए गए हैं। जिससे नगर मैं गरीब मजदूर असहाय लोगों को कच्चा राशन वितरित किया जाएगा। अभी तक नगर में लगभग 24 सो लोगों को कच्चा राशन समाजसेवियों द्वारा दिया जा चुका है। तो वहीं संपन्न लोगों से और भी सहायता राशि देने की अपील की गई है या इसके अलावा जो भी वह कच्चा सामान देना चाहते हो दे सकते है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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