शिवराज के पुतला को लेकर पुलिस और कांग्रेसियों में खींचातानी, BJP सरकार के 100 दिन को मनाया काला दिवस

शिवराज के पुतला को लेकर पुलिस और कांग्रेसियों में खींचातानी, BJP सरकार के 100 दिन को मनाया काला दिवस

बैतूल।वाजिद खान

मध्य प्रदेश के बैतूल में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुतला जलाने को लेकर पुलिस और कांग्रेसियों में पुतले को लेकर खींचातानी हो गई । खींचातानी के बाद पुतले को खींचकर कांग्रेसियों ने जलाया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की ।

दरअसल बैतूल में जिला कांग्रेस कमेटी ने भाजपा सरकार के 100 दिन पूरे होने पर इस दिन को काला दिवस बताते हुए कांग्रेसियों ने शहर में उल्टी बाजी बजाते हुए रैली निकाली और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की । लल्ली चौक पर जैसे ही कांग्रेसी पुतला लेकर पहुंचे तो पुतले को छीनने के लिए पुलिस भी सक्रिय हो गई कुछ देर पुलिस और कांग्रेसियों में पुतले को लेकर खींचातानी भी हुई बाद में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने पुतला छीन कर उसे जला दिया । कांग्रेस का कहना है कि जिस तरह भाजपा ने कांग्रेस की जनादेश वाली सरकार को गिरा कर भाजपा की सरकार बनाई है वह लोकतंत्र की हत्या है ।

भाजपा सरकार के इन 100 दिनों में प्रदेश की जनता बहुत परेशान हुई है हर जगह महंगाई का बोल बाला है । पेट्रोल डीजल महंगा है बिजली बिल बढ़ कर आ रहे हैं हर तरफ महंगाई की मार से जनता परेशान है । मंहगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है, प्रदेश का विकास ठप पड़ गया है भ्रष्टाचार भी बेहद बढ़ गया है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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