कही विधायक तो कही कमिश्नर ने थामा झाड़ू, की सफाई

कही विधायक तो कही कमिश्नर ने थामा झाड़ू, की सफाई

इंदौर, आकाश धोलपुरे

मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में शुक्रवार की सुबह कुछ ऐसा हुआ कि लोग चौंक गए। दरअसल, यहां एक विधायक ने हाथों में झाड़ू उठाकर सफाई करना शुरू कर दी तो दूसरी और शहर के मध्य क्षेत्र राजबाड़ा में भारतीय प्रशासनिक सेवा के दो वरिष्ठ अधिकारी संभागायुक्त इंदौर डॉक्टर पवन शर्मा और आयुक्त नगर निगम प्रतिभा पाल है जो अपने हाथों से इंदौर में सफ़ाई करते दिखाई दिए । इसी तरह का नजारा आज शहर के अलग अलग स्थानो पर देखने को मिला।

जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक सेवा से जुड़े अधिकारियों के हाथों में झाड़ू वाला ये नजारा आज इसलिए खास नजर आ रहा था क्योंकि आम दिनों के खास सभी सफाई मित्र आज अवकाश पर है। दरअसल, गोगानवमी के वार्षिक पर्व के अगले दिन मनाये जाने वाले अवकाश के बाद इंदौर निगमायुक्त प्रतिभापाल ने शहरवासियों और सामाजिक संगठनों से अपील की थी कि वो स्वच्छता में नम्बर 1 की हैट्रिक लगाने वाले इंदौर को आज के दिन भी रोज की तरह स्वच्छ और साफ रखें लिहाजा इंदौर के विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 1 के विधायक संजय शुक्ला सुबह सुबह अपने घर से निकले और हाथों में झाड़ू थामकर जुट गए सफाई करने में। इसी तरह शहर के सुखलिया, नवलखा, अन्नपूर्णा, एरोड्रम क्षेत्र, परदेशीपुरा, विजय नगर, भंवरकुआ क्षेत्र में गोगानवमी के अवसर पर सफाई मित्रो की छुट्टी होने से रहवासियों ने सफाई की जिम्मेदारी ली और पूरे शहर में रहवासी संघ, एनजीओ, जिला प्रशासन, नगर निगम ने सफाई का मोर्चा संभाला।

कही मेरा शहर मेरी जिम्मेदारी के नारे लगाते हुए लोगो ने सफाई व्यवस्था संभाली तो कही लोगो ने जगह – जगह पड़े प्लास्टिक वेस्ट को उठाकर एकत्रित किया और उसे निश्चित स्थान पर डाल दिया। इसी कड़ी में विधायक संजय शुक्ला ने मरीमाता चौराहा,वृन्दावन कॉलोनी में रहवासियों के साथ झाड़ू लगाई और जब ये तस्वीर सामने आई तो अन्य रहवासियों ने भी घरों से निकलकर सफाई का काम करना शुरु कर दिया। सफाई मित्रो के एक दिन के अवकाश के बाद शहर को एक बड़ी जिम्मेदारी उठाने का मौका मिला और लोग उसे बेहतर तरीके से निभाने की कोशिश करते भी दिखाई दिए।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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