24 घंटों में बदला आदेश, अब इन्ही मिली डीन की जिम्मेदारी

24 घंटों में बदला आदेश, अब इन्ही मिली डीन की जिम्मेदारी

ग्वालियर। अतुल सक्सेना।

कोरोना वायरस का प्रकोप जितना जनता को पेनिक कर रहा है लगता है उससे अधिक सरकारी मशीनरी को कर रहा है। यहाँ जारी हुआ एक तबादला आदेश इसका प्रमाण है । दरअसल संभाग आयुक्त एवं गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय की स्वशासी समिति के अध्यक्ष एमबी ओझा ने कल 24 मार्च को एक आदेश निकालकर कॉलेज की प्रभारी डीन डॉ सरोज कोठारी को हटा दिया था और उनके स्थान पर जयारोग्य अस्पताल समूह के प्रभारी संयुक्त संचालक एवं मेडिकल कॉलेज के पीएसएम विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अशोक मिश्रा को प्रभारी डीन बना दिया था । इस फेबदल के पीछे तर्क दिया गया कि कोरोना वायरस को लेकर डॉ सरोज कोठारी की तैयारियां संतोषजनक नहीं थी साथ ही अन्य प्रशासकीय व्यवस्थाओं को देखते हैं उन्हें हटाया जाता है। आदेश में अशोक मिश्रा के स्थान पर मेडिकल कॉलेज के चेस्ट एवं टीबी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ केके तिवारी को प्रभारी संयुक्त संचालक बना दिया था। आज बुधवार 25मार्च को संभाग आयुक्त एमबी ओझा के हस्ताक्षर से एक और आदेश जारी किया गया जिसमें कल 24मार्च को जारी आदेश को प्रशासकीय कारणों के चलते निरस्त करने की बात कही गई। साथ ही न्यूरो सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ एस एन अयंगार को डॉ अशोक मिश्रा के स्थान पर आगामी आदेश तक मेडिकल कॉलेज का डीन नियुक्ति करने का आदेश दिया गया। इसे अलावा डॉ अशोक मिश्रा को पूर्व की तरह जयारोग्य अस्पताल समूह का संयुक्त संचालक का प्रभार वापस कर दिया गया। खास बात ये है कि दूसरे आदेश पर ऊपर 24मार्च लिखी है जबकि संभाग आयुक्त के हस्ताक्षर के नीचे 25मार्च लिखा है यानि दोनों ही आदेश कुछ ही घंटे के अंतराल में दिया गए। समझा जा सकता है कि प्रदेश के बदले राजनैतिक घटना क्रम और कोरोना वायरस दोनों का असर ग्वालियर के प्रशासनिक अफसरों पर हो रहा है

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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