लॉक डाउन में सेमिनार की जगह वेबिनार बना सामूहिक अभिव्यक्ति का जरिया

लॉक डाउन में सेमिनार की जगह वेबिनार बना सामूहिक अभिव्यक्ति का जरिया

इंदौर। आकाश धोलपुरे।

कोविड – 19 के प्रकोप के दौर में सामाजिक दूरी बचाव का जरिया है और ये ही वजह है कि अब लोगो ने कोरोना के साथ ही अपने जीवन को नया मोड़ देना शुरु कर दिया है। ऐसे में सवाल ये उठ रहे थे की सामाजिक दूरी बनाये रख अलग अलग विषयो पर गम्भीर चिंतन और विचारों को कैसे साझा किया जाए। क्योंकि आम जीवन मे तो विषय विशेषज्ञों को बुलाकर एक मंच के जरिये सेमिनार के माध्यम से किसी विषय पर उनकी राय और अनुभव जाने जाते थे लेकिन इस भयंकर महामारी के चलते अब सेमिनार की जगह वेबिनार ने ले ली है। जिसमे सबकुछ पहले की ही तरह है लेकिन बदलाव इतना है कुर्सी टेबल और स्वागत मंच की जगह अब मोबाइल और लैपटॉप ने ले ली है और वेबकेम और मोबाइल केम अभिव्यक्ति का जरिया बने हुए है।

दरअसल, कोरोना के शुरुआती दौर से ही सामूहिक वीडियो कॉलिंग के जरिये संतो द्वारा देश विदेश के भक्तों को इस भयंकर दौर में आत्मबल बढ़ाने के साथ ही एकाग्र होने का संदेश दे रहे थे वही स्कूलों द्वारा पढ़ाई भी ज़ूम एप्प के जरिये कराई जा रही है। ऐसे में वैचारिक पृष्ठभूमि का शहर इंदौर कैसे पीछे रहेगा ये ही वजह है अब आये दिन सामुहिक विचारों और प्रयासों को वेबिनार के जरिये एक सोशल मंच मिल गया है। जहां इंदौर में 10 मई को “कोरोना की आड़ में श्रम कानूनों में बदलाव।” जैसे अहम मुद्दे पर चर्चा की गई तो कोरोना के संकट काल के बाद “उच्च शिक्षा का भविष्य” विषय पर वैष्णव वाणिज्य महाविद्यालय द्वारा भी वेबिनार आयोजित किया गया।

“कोरोना की आड़ में श्रम कानूनों के बदलाव” विषय पर संयोजक विनीत तिवारी (इंदौर) ने कहा कि कोविड-19 से निपटने के लिए सरकार ने तब लॉकडाउन कर दिया था जब भारत में कोविड-19 के केवल करीब 500 केसेस थे जिसके बाद सरकार के उस अदूरदर्शी निर्णय ने करोड़ों मज़दूरों को बेतहाशा मुश्किल में डाल दिया। उन्होंने कोरोनाकाल में मजदूरो की परेशानियो के उपायों के सुझाने के साथ ही सरकारी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। वही इंदौर एटक के महासचिव कॉमरेड रुद्रपाल यादव (इंदौर) ने कहा कि हमें प्रवासी मज़दूरों की समस्याओं पर सबसे पहले गौर करना चाहिए और सरकार ने जो बदलाव श्रम कानूनों में लाये हैं उनके खिलाफ इकट्ठे होकर लड़ाई लड़नी चाहिए। सीटू के मध्य प्रदेश के राज्य कमिटी सदस्य कॉमरेड कैलाश लिम्बोदिया (इंदौर) ने सरकार के क़दमों की कड़ी भर्त्सना की।

इधर, गुरुवार को वैष्णव वाणिज्य महाविद्यालय द्वारा आयोजित वेबिनार में “उच्च शिक्षा के भविष्य” विषय पर डॉ एस.सी.शर्मा (डायरेक्टर नैक बैंगलोर) ने कहा कि आशावादी रहे, कठिन परिस्थिति को चुनौती समझे क्योंकि अब डिजिटल प्लेटफॉर्म , शिक्षा का बेहतर साधन सिद्ध होग। राष्ट्रीय वेबिनार में अपर निदेशक उच्च शिक्षा विभाग म.प्र. डॉ. सुरेश सिलावट ने अपने उद्वबोधन में कहा कि आने वाला समय बहुत संभावनाओ से भरा है नई तकनीक से शिक्षण कार्य की गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकता है। इस वेबिनार में देश के लगभग 2500 प्रतिभागियो ने भाग लिया ।
महामारी के साथ बढ़ते और बदलते समय में वेबिनार सामूहिक अभिव्यक्ति के लिहाज से एक अहम जरिया होगा जिसका आगाज इंदौर में हो चुका है।

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