
भारत और अमेरिका के बीच होने वाली ट्रेड डील को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। एक बार फिर इस डील को लेकर अमेरिकी सरकार का बड़ा बयान सामने आया। दरअसल, अमेरिकी सरकार का कहना है कि भारत जब तक रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करेगा तब तक ट्रेड डील नहीं होगी। जानकारी के मुताबिक भारत जेनेटिकली मोडिफाइड मकई के आयात पर कुछ पाबंदियां हटाने और ज्यादा डिफेंस प्रोडक्ट खरीदने को तैयार है।
इस दौरान अमेरिका की ओर से यह जानकारी दी गई कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील का फैसला जल्दी लिया जा सकता है। अमेरिकी सरकार ने कहा कि पीयूष गोयल की लीडरशिप में भारतीय डेलिगेशन ने अमेरिकी सरकार के साथ अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की है। यह चर्चा सकारात्मक रही है।
जानिए ट्रेड डील में अब तक क्या हुआ?
पिछले कुछ समय से भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर लगातार चर्चा की जा रही है, हालांकि अब तक यह संभव नहीं हो पाया है कि दोनों देशों ने ट्रेड डील पूरी की हो। 13 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात हुई थी। इस दौरान 2030 तक व्यापार करीब 500 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा गया था। जबकि अगली बातचीत 25 से 29 मार्च के बीच दिल्ली में हुई। असिस्टेंट ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ब्रेंडन लंच के साथ यह पहले दौर की बातचीत थी। 22 अप्रैल को इस ट्रेड डील का रोडमैप तैयार किया गया और शर्तें फाइनल की गईं। वहीं, 23 और 25 अप्रैल के बीच वाशिंगटन में इस डील का दूसरा दौर शुरू हुआ और अधिकारियों के बीच चर्चा हुई।
ऐसे शुरू हुआ था टैरिफ वॉर
20 मई 2025 को तीसरे दौर की बातचीत में पीयूष गोयल ने अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की। 4 जून से शुरू हुई बातचीत में चौथा दौर शुरू हुआ जहां कृषि, टैरिफ और टेक्सटाइल पर दोनों देशों के बीच बातचीत की गई। पांचवें दौर की बातचीत 17 जुलाई को शुरू हुई। भारत द्वारा अपने हित रखे गए लेकिन इसके बाद मामला बिगड़ गया और 30 जुलाई को अमेरिका की ओर से भारत पर 25% का टैरिफ लगाया गया। इस टैरिफ के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते बिगड़ने लगे। 6 अगस्त 2025 को अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ कर दिया और इसका कारण रूस से तेल खरीदी बताया गया। इसके बाद अमेरिकी अधिकारियों ने भारत का दौरा भी रद्द कर दिया। लेकिन 31 अगस्त को दोनों देशों के तनाव के बीच ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन से मिले। अब एक बार फिर अमेरिका की ओर से इस मुद्दे पर जोर दिया गया। 22 से 24 सितंबर के बीच हुई बातचीत में अमेरिका में व्यापार निवेश को बढ़ावा देने पर बात की गई है।
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