50 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को धोना पड़ सकता है नौकरी से हाथ! होने वाली है अब तक की सबसे बड़ी छटनी?

इस समय दुनिया भर की बड़ी-बड़ी कंपनियां छंटनी पर ध्यान दे रही हैं। टीसीएस और Accenture जैसी बड़ी आईटी कंपनियों ने हाल ही में कई लोगों को नौकरियों से निकाला है। रिपोर्ट्स के मानें तो साल के अंत तक लगभग 50 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा सकता है।
50 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को धोना पड़ सकता है नौकरी से हाथ! होने वाली है अब तक की सबसे बड़ी छटनी?

एक तरफ देश में बेरोजगारी का मुद्दा चर्चा में रहता है, तो दूसरी ओर दुनिया भर में हो रही छंटनी परेशानी खड़ी कर रही है। इस समय देश के आईटी सेक्टर में बड़े पैमाने पर छंटनी की जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि साल के अंत तक 50,000 से भी ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा सकता है, हालांकि यह संख्या कम या ज्यादा भी हो सकती है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मानें तो साल 2023 और 2024 के बीच लगभग 25,000 लोगों को नौकरी से निकाला गया था।

2023-24 के बीच निकाले गए कर्मचारियों की संख्या अब 2025 के साल के अंत तक दोगुनी हो सकती है। दरअसल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इसके पीछे एक बड़ा कारण है। हर कंपनी अब तेजी से एआई की ओर विकसित हो रही है। टीसीएस भी एआई पर फोकस कर रही है, जिसके चलते हाल ही में कई कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा था।

टीसीएस और Accenture का ऐलान

हालांकि कर्मचारियों को निकालने के लिए कंपनियां कई तरह के तरीके अपना रही हैं। दरअसल, परफॉर्मेंस सही न होने का हवाला देकर कर्मचारियों को कंपनी से निकाला जा रहा है, जबकि और भी कई कारण बताए जा रहे हैं। हाल ही में टीसीएस ने बड़ी छंटनी का ऐलान किया था। दरअसल, टीसीएस की योजना है कि मार्च 2026 तक लगभग 12,000 से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जाएगा। यह अब तक की टीसीएस की सबसे बड़ी छंटनियों में से एक मानी जा रही है। वहीं दूसरी ओर Accenture ने भी जून और अगस्त के बीच बड़ी छंटनी करते हुए 11,000 कर्मचारियों को कंपनी से निकाला। इन दोनों कंपनियों ने छंटनी को लेकर बड़ी चर्चा छेड़ दी है।

किसने जताई इतनी बड़ी छटनी की चिंता?

दरअसल, TeamLease Digital की सीईओ नीति शर्मा ने संभावना जताई है कि आईटी सेक्टर में साल के अंत तक 55,000 से 60,000 तक छंटनी की जा सकती है। अब कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा ले रही हैं और कर्मचारियों की जगह टेक्नोलॉजी को ज्यादा प्राथमिकता दे रही हैं। भारत में भी बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने आप को एआई ट्रांसफॉर्मेशन के दौर में बदल रही हैं। दरअसल, कंपनियों द्वारा न सिर्फ कॉस्ट कटिंग पर ध्यान दिया जा रहा है बल्कि एआई की मदद से रणनीतिक बदलाव भी किए जा रहे हैं। इस बदलते दौर में अब कंपनियां क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स, एआई और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में ज्यादा निवेश कर रही हैं, हालांकि पारंपरिक आउटसोर्सिंग कंपनियों को इस समय सबसे ज्यादा समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

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Rishabh Namdev

4 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev →
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