Government Scheme: कारीगरों और कलाकारों के लिए खास है ये सरकारी योजना, मिलेंगी ढेरों सुविधाएं

Government Scheme: कारीगरों और कलाकारों के लिए खास है ये सरकारी योजना, मिलेंगी ढेरों सुविधाएं

Government Scheme: भारत सरकार स्वास्थ्य, पढ़ाई और बिजनेस समेत समाज के विभिन्न वर्गों के लिए कई योजनाएं चलाती हैं। आज हम आपको ऐसी योजना के बारे में बताने जा रहे हैं, जो केंद्र सरकार कलाकारों और कारीगरों के लिए लेकर आ रही है। इस स्कीम का नाम प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना है। देश के पारंपरिक कलाकारों को इसका लाभ होगा। जिसमें 140 से अधिक जातियों को शामिल किया गया है। बजट 2023-24 की पेशकश के दौरान वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया था। बहुत जल्द यह लागू भी होने वाला है।

मिलेगी ये सुविधाएं

इस योजना के तहत विभिन्न पारंपरिक और कौशल का सशक्तिकरण होगा। साथ ही कलाकारों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी। कारीगरों के उत्पादनों को उचित दाम मिलेगा। इतना ही नहीं सरकार क्लाकारों और कारीगरों को प्रशिक्षण भी देगी। साथ ही प्रोडक्ट की मार्केटिंग और डिस्ट्रब्यूशन में भी मदद करेगी। इस योजना को MSME सेक्टर के तहत शुरू किया जा रहा है। जिससे ट्रेनिंग फंडिंग भी सरकार द्वारा प्रवाइड करवाया जाएगा। इतना ही शिल्पकारों को नई टेक्नोलॉजी की सुविधा भी मिलेगा। साथ ही उनकी आय बढ़ाने के लिए हर मुमकिन कोशिश भी की जाएगी।

इन लोगों को मिलेगा लाभ

कोई भी भारतीय मूल निवासी स्कीम का फायदा उठाया सकता है। हालांकि इसके लिए केवल विश्वकर्मा समुदाय के नागरिक की पात्र होंगे। लाभार्थियों का पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार होना अनिवार्य होगा। किसी भी उम्र का व्यक्ति इसके लिए आवेदन कर सकता है। इसके जरिए सरकार देश में कला और कारीगरी सेक्टर को प्रोत्साहित करेगी।

Manisha Kumari Pandey
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पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey →
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