आज सेंसेक्स 1700 अंक टूटा, निफ्टी 500 अंक गिरा, जानिए क्या है शेयर बाजार में गिरावट का कारण?

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़े युद्ध जैसे तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में 4 मार्च को तेज गिरावट दर्ज हुई। प्री-ओपनिंग में सेंसेक्स करीब 1700 अंक और निफ्टी 500 अंक टूट गया, जबकि रुपया भी डॉलर के मुकाबले 92.15 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंचा। कच्चे तेल में तेजी, विदेशी बिकवाली और वैश्विक सेल-ऑफ को बाजार गिरने की मुख्य वजह माना जा रहा है।
आज भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स में 500 अंक की बढ़त, निफ्टी में भी हरा निशान, पढ़ें यह खबर

घरेलू बाजार में मंगलवार, 4 मार्च की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई। प्री-ओपनिंग में सेंसेक्स 1700 अंक यानी लगभग 2.04% गिरकर 78,500 के पास आ गया, जबकि निफ्टी 500 अंक यानी करीब 2% टूटकर 24,350 के स्तर पर फिसल गया। शुरुआती कारोबार में बैंकिंग और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव दिखा।

इस गिरावट का ट्रिगर सिर्फ लोकल नहीं है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने बाजार की जोखिम-धारणा को अचानक बदल दिया है। जियोपॉलिटिकल तनाव के ऐसे दौर में निवेशक आम तौर पर इक्विटी से पैसा निकालकर सोना-चांदी जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित एसेट्स की तरफ जाते हैं, और यही पैटर्न इस बार भी दिख रहा है।

गिरावट के पीछे तीन बड़े फैक्टर

पहला, ईरान-इजराइल युद्ध की आशंका से सप्लाई चेन बाधित होने का जोखिम बढ़ा है। दूसरा, कच्चे तेल में तेज उछाल ने भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए महंगाई और इंपोर्ट बिल की चिंता बढ़ा दी है। तीसरा, ग्लोबल इक्विटी में बिकवाली—खासकर अमेरिका और एशिया—का असर भारतीय बाजार पर सीधे दिखा।

ब्रेंट क्रूड में मंगलवार को भी करीब आधा फीसदी तेजी दर्ज की गई और यह 80 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। पिछले तीन कारोबारी दिनों में इसमें 13% से ज्यादा उछाल आ चुका है। बाजार विशेषज्ञों के अनुमान में तनाव बढ़ने पर तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है, जिसका असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।

मौजूदा अनुमान के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल 95 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 100 रुपए तक और डीजल 88 रुपए से 92 रुपए तक जा सकता है। दूसरे शहरों में भी इसी दिशा में बढ़ोतरी की आशंका बताई जा रही है।

रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

इक्विटी गिरावट के साथ मुद्रा बाजार में भी दबाव रहा। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 66 पैसे टूटकर 92.15 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक व्यापारिक तनाव ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला।

एक्सचेंज डेटा के अनुसार 2 मार्च को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार में 3,295 करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 8,594 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला, लेकिन वैश्विक दबाव के सामने यह पर्याप्त नहीं दिखा।

एशिया और अमेरिका से भी नकारात्मक संकेत

एशियाई बाजारों में भी तेज गिरावट दर्ज हुई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 585 अंक यानी करीब 10% टूटकर 5,206 पर रहा। जापान का निक्केई 2,188 अंक यानी 3.89% गिरकर 54,090 पर ट्रेड करता दिखा। हांगकांग का हैंगसेंग 480 अंक यानी 1.87% गिरकर 25,285 पर रहा, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट 24 अंक यानी 0.54% गिरकर 4,098 पर पहुंचा।

अमेरिकी बाजार ने 3 मार्च को इंट्राडे में बड़ी अस्थिरता दिखाई। डाओ जोंस एक समय 1,200 अंक से ज्यादा गिरा, फिर निचले स्तरों से करीब 800 अंक की रिकवरी भी आई। बंद होने पर डाओ 403 अंक यानी 0.83% गिरकर 48,501 पर रहा। नैस्डैक कंपोजिट 1.02% टूटकर 22,516 पर और S&P 500 इंडेक्स 65 अंक यानी 0.94% गिरकर 6,816 पर बंद हुआ।

हॉर्मुज रूट पर जोखिम ने बढ़ाई चिंता

अमेरिकी बाजार में आई रिकवरी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान से जोड़ा गया। ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने यूनाइटेड स्टेट्स डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन से समुद्री व्यापार की वित्तीय सुरक्षा के लिए वाजिब कीमत पर इंश्योरेंस उपलब्ध कराने को कहा है। यह टिप्पणी उस समय आई जब ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दी।

हॉर्मुज जलमार्ग वैश्विक तेल सप्लाई का अहम रूट है और दुनिया की 20% से ज्यादा तेल आपूर्ति इसी से गुजरती है। ट्रम्प ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नौसेना टैंकरों को सुरक्षा देकर बाहर निकाल सकती है ताकि ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो। फिलहाल यही भू-राजनीतिक जोखिम भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा ओवरहैंग बना हुआ है।

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4 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev →
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