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अब हर EV बैटरी पर 21 अंकों का यूनिक नंबर लगाने की तैयारी, क्वालिटी और लाइफ चैक करना होगा आसान

Written by:Rishabh Namdev
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सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अब इलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरियों को लेकर एक नया सिस्टम तैयार किया है, जिससे उनकी ट्रैकिंग और पहचान करना आसान होगा। दरअसल सरकार की ओर से प्रस्ताव रखा गया है कि देश में हर EV बैटरी का अपना एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन कोड हो, जिससे बैटरी की पूरी जानकारी उपलब्ध रहे।
अब हर EV बैटरी पर 21 अंकों का यूनिक नंबर लगाने की तैयारी, क्वालिटी और लाइफ चैक करना होगा आसान

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा इलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरियों की पहचान और उन्हें ट्रैक करने के लिए अब एक नया सिस्टम तैयार किया गया है। दरअसल देश में हर EV बैटरी का अपना एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर देने का प्रस्ताव सरकार की ओर से रखा गया है। इस यूनिक कोड को बैटरी पैक आधार नंबर (BPAN) कहा जाएगा। यह यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर 21 अंकों का होगा। इसका उद्देश्य बैटरी से जुड़ी पूरी जानकारी प्राप्त करना है। इस यूनिक नंबर के जरिए बैटरी के बनने से लेकर उसके खराब होने या रीसायकल होने तक की पूरी जानकारी सिंगल क्लिक पर हासिल की जा सकेगी।

मिनिस्ट्री की ओर से जारी की गई ड्राफ्ट गाइडलाइंस के मुताबिक हर बैटरी पर 21 कैरेक्टर का BPAN होना अनिवार्य होगा। इसकी जिम्मेदारी बैटरी बनाने वाली कंपनियों और इन्हें इंपोर्ट करने वालों की होगी। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर बैटरी पैक पर 21 अंकों का यह यूनिक कोड मौजूद हो।

सभी बैटरियों के लिए लागू किया जाएगा यह नंबर

यह यूनिक नंबर सभी बैटरियों के लिए लागू किया जाएगा। कंपनियों के खुद के इस्तेमाल के लिए बनाई गई बैटरियों में भी इस नंबर का होना अनिवार्य होगा। साथ ही बाजार में बिकने वाली बैटरियों पर भी यह नंबर जरूरी होगा। गाइडलाइंस के मुताबिक बैटरी पैक आधार नंबर को ऐसी जगह लगाया जाएगा, जिसे आसानी से देखा जा सके। इसकी जिम्मेदारी कंपनियों की होगी। कंपनी यह सुनिश्चित करेगी कि यह नंबर ऐसी जगह लगाया जाए, जहां यह खराब न हो और इसे मिटाया न जा सके। इतना ही नहीं, कंपनियों को इन बैटरियों का रियल टाइम डेटा बैटरी पैक आधार नंबर के आधिकारिक पोर्टल पर भी अपलोड करना होगा।

जानिए इसके क्या फायदे होंगे?

बैटरी पैक आधार नंबर के कई फायदे होंगे। सबसे बड़ा फायदा सेफ्टी को लेकर होगा। बैटरी की क्वालिटी और परफॉर्मेंस को ट्रैक करना कंपनियों के लिए आसान रहेगा। इसके अलावा पुरानी बैटरियों को दोबारा आसानी से इस्तेमाल में लाया जा सकेगा। साथ ही खराब बैटरियों की सही डंपिंग और रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया भी की जा सकेगी। जब कोई खरीदार बैटरी खरीदेगा तो उसे बैटरी की पूरी हिस्ट्री भी पता रहेगी। जब बैटरी रीसायकल हो जाएगी तो उसे फिर से नया बैटरी पैक आधार नंबर मिलेगा। कच्चे माल की माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, इस्तेमाल और आखिर में रीसाइक्लिंग से जुड़ी पूरी जानकारी भी इस नंबर में दर्ज रहेगी।

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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