केंद्र सरकार ने आगामी पूर्ण बजट की तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी सिलसिले में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को नई दिल्ली में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण बजट-पूर्व परामर्श बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी बजट के लिए राज्यों की अपेक्षाओं और सुझावों को जानना था।
बैठक के दौरान विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि विकास कार्यों को गति देने वाली ‘पूंजीगत निवेश हेतु विशेष सहायता योजना’ को आगे भी जारी रखा जाए। साथ ही, उन्होंने इस योजना के तहत आवंटन बढ़ाने की भी मांग की ताकि राज्यों में विकास परियोजनाओं को और मजबूती मिल सके।
पूंजीगत निवेश योजना पर राज्यों का जोर
राज्यों के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस विशेष सहायता योजना से प्रदेशों में नई परिसंपत्तियों का निर्माण हो रहा है और पूंजीगत निवेश को भी बड़ा समर्थन मिल रहा है। यह योजना राज्यों में विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने में बेहद मददगार साबित हो रही है। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 से लेकर अब तक केंद्र सरकार इस योजना के तहत 4.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी कर चुकी है।
बैठक में कौन-कौन हुए शामिल?
इस उच्च-स्तरीय बैठक में कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया। इनमें दिल्ली, गोवा, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, मेघालय और सिक्किम के मुख्यमंत्री शामिल थे। वहीं, अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भी बैठक में मौजूद रहे।
इनके अलावा विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्री और अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि भी चर्चा का हिस्सा बने। बैठक में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और मणिपुर के राज्यपाल ने भी भाग लिया। केंद्र सरकार की ओर से वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग, व्यय विभाग और राजस्व विभाग के सचिवों समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।





