नियमों को लेकर RBI सख्त, इन 3 बैंकों पर लगाया भारी जुर्माना, कहीं इनमें आपका अकाउंट तो नहीं?

आरबीआई ने एक बार फिर नियमों का उल्लंघन होने पर बड़ी कार्रवाई की है। तीन बैंकों पर जुर्माना लगाया है। इसमें एयरटेल पेमेंट्स बैंक लिमिटेड भी शामिल है। आइए जानें ग्राहकों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
RBI action

रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने तीन बैंकों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। इस लिस्ट में एयरटेल पेमेंट्स बैंक लिमिटेड के साथ-साथ कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में स्थित दो सहकारी बैंक भी शामिल हैं। नियमों का सही से अनुपालन न होने पर यह कार्रवाई की है। इस कार्रवाई की जानकारी आरबीआई ने 30 मार्च को प्रेस विज्ञप्ति के जरिए दी है।

31 मार्च 2025 को किए गए किए निरीक्षण के दौरान आरबीआई को नियमों के अनुपालन में खामियों का पता चला था। जिसके बाद तीनों बैंकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस पर मिले जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई प्रस्तुतियों के आधार पर सभी आरोप सही पाए गए। इसके बाद पेनल्टी लगाने का फैसला सेंट्रल बैंक ने लिया। हालांकि इसका असर बैंकों और ग्राहकों के बीच हो रहे किसी भी लेनदेन या एग्रीमेंट पर नहीं पड़ेगा।

एयरटेल पेमेंट्स बैंक पर क्यों लगा जुर्माना?

एयरटेल पेमेंट्स बैंक लिमिटेड पर 31.80 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस बैंक ने वित्त वर्ष 2024-25 के वार्षिक वित्तीय विवरण में कुछ शिकायतों का खुलासा नहीं किया। ऐसे में आरबीआई द्वारा जारी “डिस्क्लोजर इन फाइनेंशियल स्टेटमेंट” के दिशा निर्देशों का उल्लंघन हुआ। आरोप साबित होने पर आरबीआई ने पेनल्टी लगाना सही समझा।

इन दो बैंकों पर भी गिरी गाज 

कर्नाटक में स्थित द दावनगेरे डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 1.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। बैंक निर्धारित समय के भीतर ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड को सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री पर अपलोड नहीं कर पाया। बीआर अधिनियम का उल्लंघन करते हुए अन्य सहकारी समितियों में शेयर रखें। इसके अलावा कुछ ग्राहकों को प्रत्येक ग्राहक के लिए यूसीआईसी देने के बजाय कई  ग्राहक पहचान कोड भी आवंटित किए।

उत्तर प्रदेश के इटावा में स्थित नगर सहकारी बैंक लिमिटेड पर 3 लाख रुपये का जुर्माना आरबीआई ने लगाया है। इस बैंक ने निदेशकों से संबंधित लोन स्वीकृत किए। ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड को सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री पर अपलोड भी नहीं कर पाया। उधारकर्ता एक्स्पोज़र के लिए निर्धारित विनियामक सीमा का भी उल्लंघन किया। इसके अलावा ये पहचान और परिसंपत्ति वर्गीकरण मानदंडों के अनुसार कुछ उधारकर्ताओं कि लोन सुविधा को गैर निष्पादित परिसंपत्तियों के रूप में वर्गीकृत नहीं करने में असफल रहा।

Manisha Kumari Pandey
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