भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर सख्ती दिखाई है। प्राइवेट सेक्टर के सिटी यूनियन बैंक पर 10.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा दो नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों पर भी पेनल्टी लगाई गई है। इस कार्रवाई की जानकारी सेंट्रल बैंक ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट http://www.rbi.org.in/ पर दी है।
31 मार्च 2025 तक तक आरबीआई ने बैंक और दोनों कंपनियों के वित्तीय स्थिति को चेक करने के लिए एक संवैधानिक निरीक्षण किया था। इस दौरान दिशा निर्देशों में खामियों का खुलासा हुआ। इसके बाद बैंक और एनबीएफसी को कारण बताओं नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया। इस पर मिली प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई दलीलों पर विचार करने के बाद आप सही पाए गए। इसके बाद पेनल्टी लगाने का फैसला लिया गया।
बैंक ने तोड़े ये नियम
सिटी यूनियन बैंक में 25,000 रुपये तक के कुछ कृषि प्राथमिकता क्षेत्र के लोन पर लोन संबंधित शुल्क लगाए। इसके अलावा स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के स्तर का डेटा सूचना कंपनियों को रिपोर्ट भी नहीं किया। इसलिए आरबीआई ने बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 और क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी (रेगुलेशन) एक्ट 2005 के विभिन्न प्रावधानों के तहत जुर्माना लगाने का फैसला दिया। हालांकि कार्रवाई का असर बैंक और ग्राहकों के बीच हो रहे किसी भी लेनदेन या एग्रीमेंट पर नहीं पड़ेगा।
PR315208CBAAA9C1C4AA4B0296B70551472A1इन दो कंपनियों पर लगी पेनल्टी, जानें वजह
नेवा इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड पर 2.70 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इस कंपनी ने निदेशकों की नियुक्ति करते समय आरबीआई से पहले लिखित अनुमति नहीं ली। जिसके परिणाम स्वरूप कुछ को छोड़कर 30% से अधिक निदेशकों में बदलाव हुआ। जिसका सीधा असर मैनेजमेंट पर पड़ा। मिंटीफी फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड पर 3.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस कंपनी ने ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड को सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री पर निर्धारित समय सीमा के भीतर अपलोड नहीं किया। आरबीआई एक्ट 1934 के विभिन्न प्रावधानों के तहत इस कंपनियों पर पेनल्टी लगाई गई है। इसका असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा।
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