
रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने पांच बैंकों पर पर मौद्रिक जुर्माना लगाया है। इस बात की जानकारी RBI ने प्रेस विज्ञप्ति के जारी 29 सितंबर 2025 को दी है। बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के तहत जारी विभिन्न दिशा निर्देशों का अनुपालन न होने पर यह कदम उठाया गया है। आरबीआई देशभर के सभी बैंकों को रेगुलेट करता है। ग्राहकों के हितों की सुरक्षा करता है। जब भी कोई बैंक या एनबीएफसी नियमों की अनदेखी करते हैं, तो उन पर जुर्माना लगाता है।
महाराष्ट्र में स्थित बीड डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 2.25 लाख का जुर्माना लगाया है। सूरत गुजरात के द पंचशील मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 1 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है। वहीं केरल के वायनाड में स्थित द सुल्तान्स बैटरी को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड पर एक लाख रुपये और द निलांबुर को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कामराज को-ऑपरेटिव टाउन बैंक लिमिटेड तमिलनाडु पर एक लाख रुपये की पेनल्टी लगी है।
आखिर आरबीआई ने क्यों उठाया यह कदम?
बीड डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड:- यह बैंक निर्धारित समय के भीतर पात्र दावा न की गई राशि को जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता कोष में ट्रांसफर करने में विफल रहा। अपने ग्राहकों के लोन की जानकारी चार सीआईसी को प्रस्तुत भी नहीं कर पाया। कुछ खातों में खाता निर्धारित संबंध स्थापित करते समय अपेक्षित ग्राहक उचित परिश्रम (सीडीडी) प्रक्रिया को भी पूरा नहीं कर पाया।
द पंचशील मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड:– इस बैंक ने अपने ग्रहकों को एसएमएस अलर्ट पर तुरंत “Reply” देने में साक्षम बनाने में विफल रहा। अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के संबंध में आपत्ति दर्ज कराने के लिए यह जरूरी था।
द सुल्तान्स बैटरी को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड:- इस बैंक ने निदेशकों से संबंधित लोन स्वीकृत किए। जिससे लोन और एडवांस पर से संबंधित आरबीआई द्वारा जारी दिशा निर्देशों का उल्लंघन हुआ।
द निलांबुर को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड:– इस बैंक ने अनिवासी (एक्सटर्नल) रुपया जमा पर संबंधित घरेलू फिक्स्ड डिपॉजिट तुलना में अधिक ब्याज दरों की पेशकश की।
कामराज को-ऑपरेटिव टाउन बैंक लिमिटेड:– इस बैंक ने एसएएफ के तहत ज्यादा दिशा निर्देशों का उल्लंघन किया। नए लोन और एडवांस के लिए एकल उधारकर्ता जोखिम सीमा को लागू नियामक सीमा के 50% तक कम नहीं किया। एफडी/एनएससी/केवीपी बीमा पॉलिसीयों की कॉलेटरल सिक्योरिटी द्वारा समर्थित नहीं नए लोन और एडवांस स्वीकृत और वितरित किए। बैलेंस शीट और जमा राशि का साइज भी बढ़ाया।
क्या ग्राहकों पर पड़ेगा असर?
एक निरीक्षण के दौरान बैंकों द्वारा दिशा निर्देशों के अनुपालन में खामियों का पता आरबीआई को चला था। जिसके बाद बैंकों को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया। नोटिस पर आए रिप्लाई और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई मौखिक प्रस्तुतियों के आधार पर पेनल्टी लगाने का फैसला लिया गया। रिजर्व बैंक ने यह स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई का असर बैंक या ग्राहकों के बीच हो रहे किसी भी लेनदेन या एग्रीमेंट पर नहीं पड़ेगा। खाताधारकों को चिंतित रहने की जरूरत नहीं।

