
रिजर्व का बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने देशभर के अलग-अलग राज्यों में स्थित पांच बैंकों पर मौद्रिक जुर्माना लगाया है। यह कदम बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के 47ए(1)(सी) और 46(4)(i) और 56 के तहत दी गई शक्तियों के तहत उठाया गया है। इन पर नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है। इस बात की जानकारी आरबीआई ने प्रेस विज्ञप्ति के जरिए 9 सितंबर मंगलवार को दी है।
मार्च 2024 को इन बैंकों के फाइनेंशियल स्टेटस की जांच करने के लिए संवैधानिक निरीक्षण किया गया था। इस दौरान पता चला कि बैंक दिशा निर्देशों का सही से अनुपालन नहीं कर रहे हैं। जिसे लेकर कारण बताओं नोटिस जारी किया गया। नोटिस पर आई प्रतिक्रिया और मौखिक सुनवाई के दौरान दी गई प्रस्तुतियों के आधार पर आरबीआई ने पेनाल्टी लगाने का फैसला लिया।
मणिपुर और त्रिपुरा के इन बैंकों पर लगा जुर्माना
मणिपुर महिला सहकारी बैंक लिमिटेड पर 1.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस पर यूसीबी से संबंधित नियमों का सही से अनुपालन न करने का आरोप है। बैंक ने विवेकपूर्ण अंतर बैंक (सकल) और प्रतिपक्ष जोखिम सीमा का उल्लंघन किया। द त्रिपुरा स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 7.50 लाख रुपये का जुर्माना केवाईसी से संबंधित दिशा निर्देशों का अनुपालन न करने के आरोप में लगाया गया है। यह बैंक सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री पर निर्धारित समय के भीतर ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड को अपलोड करने में विफल रहा।
इन बैंकों ने तोड़े लोन से जुड़े नियम
महाराष्ट्र के रैगड़ डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 2.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसने निदेशकों से संबंधित लोन स्वीकृत किए। कर्नाटक के द डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड बीदर पर 5.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस बैंक ने भी निदेशकों से संबंधित लोन स्वीकृत किए। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए अकाउंट और बैलेंस शीट को पब्लिश करने में बिफल रहा। आरबीआई या नाबार्ड द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर कॉपी को फर्निश भी नहीं कर पाया।
द ओट्टापलम को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड, पलक्कड़ केरल पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस बैंक ने100% से अधिक जोखिम भरा वाले लोन और एडवांस स्वीकृत की। कुछ नगद लोन खातों को डेबिट कार्ड भी जारी किए गए। जिससे एएएफ नियमों का उल्लंघन हुआ। बता दें आरबीआई ने यह स्पष्ट किया है कि इस एक्शन का असर ग्राहकों और बैंकों के बीच हो रहे लेनदेन या एग्रीमेंट पर नहीं पड़ेगा।

