RBI की बड़ी कार्रवाई: इन 2 बैंकों पर ठोका भारी जुर्माना, कहीं इनमें आपका अकाउंट तो नहीं?

दो बैंकों पर आरबीआई ने सख्ती दिखाई है। बैंकिंग नियमों का सही से अनुपालन न होने पर पेनल्टी लगाई है। केंद्रीय बैंक ने बयान भी जारी किया है। आइए जानें इसके पीछे क्या वजह है और क्या ग्राहकों पर भी इसका असर पड़ेगा?
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जब भी कोई बैंक नियमों का सही से अनुपालन करने में विफल होता है, तो रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) सख्त एक्शन लेता है। एक बार फिर आरबीआई की कार्रवाई सामने आई है। दो सहकारी बैंकों पर मौद्रिक जुर्माना लगाया गया है।  इस बात की जानकारी केंद्रीय बैंक द्वारा 11 सितंबर गुरुवार को दी गई है। एक्शन का प्रभाव ग्राहकों पर पड़ेगा या नहीं? आरबीआई ने इसे लेकर भी स्पष्टीकरण जारी किया है।

गुजरात में स्थित प्रोग्रेसिव मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड अहमदाबाद पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस पर केवाईसी, कस्टमर प्रोटेक्शन समेत कई बैंकिंग नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है। सिक्किम स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

दोनों बैंकों द्वारा दिशा निर्देशों का उल्लंघन करने का पता चला एक इंस्पेकशन के दौरान चला था। जिसके बाद कारण बताओं नोटिस जारी किया गया। नोटिस पर आए रिप्लाई और मौखिक सुनवाई के दौरान दी गई प्रस्तुतियों के आधार पर ही जुर्माना लगाने का फैसला लिया गया।

प्रोग्रेसिव मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक ने तोड़े ये नियम 

गुजरात के इस बैंक ने लेनदेन की एक साथ जांच करने के बजाय तिमाही आधार पर समवर्ती लेखा परीक्षा की और रिपोर्ट देरी से प्रस्तुत की। इसके अलावा कुछ खातों के जोखिम वर्गीकरण की आवधिकसमीक्षा भी नहीं कर पाया, जिसकी अवधिकता कम से कम 6 महीने में एक बार थी। अपने ग्राहकों को अन अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन से जुड़े आपत्ति सूचित करने के लिए एसएमएस अलर्ट पर “Reply” द्वारा तुरंत प्रक्रिया देने में सक्षम भी नहीं बना पाया।

सिक्किम के सहकारी बैंक ने किया इन नियमों का उल्लंघन 

सिक्किम स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड निर्धारित समय सीमा के भीतर ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड को सेंट्रल सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री की अपलोड करने में विफल रहा।  आरोपों की पुष्टि होने के बाद ही पेनल्टी लगाई है। आरबीआई ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि दोनों बैंकों के खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरीके से विनियामक कमियों पर आधारित है।  भविष्य में होने वाले किसी भी एक्शन पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। न ही इसका उद्देश्य ग्राहकों और बैंकों के बीच हो रहे लेनदेन या एग्रीमेंट की वैधता पर प्रभाव डालना है।

Manisha Kumari Pandey
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