
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक बार फिर नियमों का उल्लंघन होने पर सख्त कदम उठाया है। पाँच बैंकों पर मौद्रिक जुर्माना लगाया गया है। वित्तीय स्थिति के संदर्भ में किए गए निरीक्षण के दौरान दिशानिर्देशों के अनुपालन में खामियों का खुलासा हुआ था। जिसके बाद आरबीआई ने कार्रवाई से पहले सभी बैंकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। जांच के दौरान दी गई प्रस्तुतियों के आधार पर पेनल्टी लगाने का फैसला लिया गया।
इस लिस्ट में द आनंद मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (गुजरात), द बेल्लारी को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड (कर्नाटक), द धरमपुरी जिला सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (तमिलनाडु), द कालाबुरागी और यादगिर डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड (कर्नाटक) और द भारत को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (बेंगलुरू, कर्नाटक) शामिल हैं।
कर्नाटक के बैंकों पर लगा कितना जुर्माना?
- द बेल्लारी को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड ने अपने एक निदेशक को लोन स्वीकृत किया। इसके अलावा बीआर अधिनियम का उल्लंघन करते हुए अन्य सहकारी समितियां में शेयर भी रखें। इसलिए बैंक पर 1.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
- द कालाबुरागी और यादगिर डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड ने निर्धारित समय सीमा के भीतर ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड को केंद्रीय केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री पर अपलोड नहीं किया। इसपर 50 हजार पेनल्टी लगाई गई है।
- द भारत को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड पर एसएएफ के तहत जारी निर्देशों का पालन न करने का आरोप है। इसपर 50 हजार जुर्माना लगाया गया है। बैंक ने उच्च स्तर के एनपीए या डिफॉल्ट वाले क्षेत्रों को लोन स्वीकृत और रिन्यू किया। कॉलेटरल सिक्योरिटी द्वारा समर्थित नहीं किए गए लोन और एडवांस स्वीकृत और वितरित किए। इसके अलावा एसबीआई द्वारा दी जाने वाली दरों से अधिक ब्याज दरों पर डिपॉजिट ऑफर किया।
द आनंद मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड
केवाईसी से संबंधित नियमों का अनुपालन न होने पर इस बैंक पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। बैंक ने आंतरिक लेखा परीक्षा के अपने मुख्य प्रबंधन कार्य को आउटसोर्स किया। इसके अलावा कुछ खातों के जोखिम वर्गीकरण की आवधिक समीक्षा करने में भी विफल रहा, जिसकी अवधिकता कम से कम 6 महीने में एक बार थी।
द धरमपुरी जिला सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड
तमिलनाडु में स्थित इस बैंक पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस बैंक ने भी निदेशकों से संबंधित लोन स्वीकृत किए। नाबार्ड द्वारा किए गए इंस्पेक्शन के दौरान दिशा निर्देशों के उल्लंघन का पता चला था।
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई का असर ग्राहकों और बैंकों के बीच हो रहे किसी भी एग्रीमेंट या ट्रांजैक्शन पर नहीं पड़ेगा। यदि आपका भी इनमें से किसी बैंक में खाता है तो चिंता की कोई बात नहीं है। इसके अलावा भविष्य में होने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

