
सितंबर महीने के आखिरी दिन आरबीआई की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। इस बार पब्लिक सेक्टर के इंडियन ओवरसीज बैंक पर रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने 31. 80 लाख रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के की विभिन्न प्रावधानों के तहत यह कदम उठाया गया है। बैंक पर पर प्राथमिक क्षेत्र ऋण यानि PSL से संबंधित दिशा निर्देशों का उल्लंघन करने का आरोप है।
इस एक्शन की जानकारी 30 सितंबर मंगलवार को आरबीआई ने प्रेस विज्ञप्ति के जरिए दी है। जिसके मुताबिक 31 मार्च 2024 को बैंक के फाइनेंशियल स्टेटस की जांच करने के लिए एक इंस्पेक्शन का आयोजन किया गया था। इस दौरान दिशा निर्देशों के अनुपालन में खामियों का खुलासा हुआ। जांच रिपोर्ट को देखते हुए IOB को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया और पूछा गया कि उन पर पेनल्टी क्यों ना लगाया जाए?
बैंक ने इस नोटिस पर लिखित जवाब दिया। व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान अतिरिक्त स्पष्टीकरण और मौखिक प्रस्तुतियाँ भी दी गई है। जिसके के आधार पर बैंक पर लगे आरोप सही पाए गए। इसके बाद केंद्रीय बैंक ने पेनल्टी लगाने का आदेश 29 सितंबर को जारी किया।
बैंक ने तोड़े ये नियम
बैंक में कुछ पीएसएल खाते में लोन संबंधित शुल्क वसूला। जिसमें से प्रत्येक में 25000 रुपये तक ऋण राशि स्वीकृत थी। बता दें कि नियमों के अनुसार प्राथमिक क्षेत्र ऋण का उद्देश्य किसानों, सूक्ष्म उद्यमों और कमजोर वर्गों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। लेकिन इसके बाद भी खातों में बैंक ने एक्स्ट्रा चार्ज वसूला। जिससे आरबीआई द्वारा जारी पीएसएल-लक्ष्य एवं वर्गीकरण दिशा निर्देशों का उल्लंघन हुआ।
क्या ग्राहकों पर पड़ेगा असर?
इंडियन ओवरसीज बैंक भारत के प्रमुख पब्लिक सेक्टर बैंकों की गिनती में शामिल है। इसका हेड क्वार्टर चेन्नई में स्थित है। देशभर में लाखों ब्रांच संचालित करता है। लाखों कस्टमर भी जुड़े हुए हैं और अनेक सेवाओं का लाभ उठाते हैं। बैंक के खिलाफ की गई यह करवाई केवल नियमों का सही से अनुपालन न होने पर उठाया गया है। इसका असर बैंक और ग्राहकों के बीच हो रहे हैं किसी भी लेनदेन पर नहीं पड़ेगा। सभी सेवाओं का लाभ ग्राहक पहले की तरह उठा पाएंगे। लेकिन केंद्रीय बैंक की कार्रवाई यह संदेश देता है कि ग्राहकों के हितों और और सुरक्षा के साथ कोई भी खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नोटिफिकेशन में रिजर्व बैंक ने इस बात की पुष्टि की है। यह कहा कि, “यह कार्रवाई नियामक अनुपालन में खामियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य बैंक द्वारा ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी ट्रांजैक्शन या समझौते की वैधता पर असर डालना नहीं है। इसके अलावा मौद्रिक जुर्माना लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के खिलाफ की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर भी कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।”

