रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने खराब ऋणों (NPA) नियमों को सख्त करने का फैसला लिया है। सोमवार को अपेक्षित ऋण हानि (ईसीएल) आधारित हानि प्रावधान ढांचे को अपनाने के लिए फाइनल दिशा निर्देश जारी किए हैं। जिसके तहत कई बदलाव हो सकते हैं।
आरबीआई का कहना है कि इन निर्देशों का उद्देश्य क्रेडिट रिस्क मैनेजमेंट प्रथाओं को और भी मजबूत करना है। नियामक ढांचे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थित वित्तीय रिपोर्टिंग सिद्धांतों के अनुरूप करना है। नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाएंगे।
नए ECL फ्रेमवर्क के तहत यदि बैंक को लगता है कि किसी लोन में भविष्य में नुकसान हो सकता है, तो उसे पहले से पूंजी तैयार रखनी होगी। पहले सिस्टम में नुकसान होने के बाद प्रावधान होता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नुकसान होने की संभावना पर बैंक इससे संबंधित तैयारी करेंगे।
खराब लोन के लिए नियम सख्त हुए
नए नियमों के तहत अगर कोई लोन 30 दिन तक बकाया हो जाता है, तो यह खतरे की शुरुआत का संकेत माना जाएगा। बैंक को इसे लेकर तुरंत सतर्क होना पड़ेगा अगर। वहीं लोन 90 दिन से ज्यादा बकाया रहा, तो पुराना नया नियम ही प्रभावी होगी। उसे NPA कैटेगरी यानि खराब ऋण के कैटेगरी में रखा जाएगा। सेंट्रल बैंक ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा एनपीए वर्गीकरण नियम जारी रहेंगे।
ऋण को तीन चरणों में विभाजित करना होगा
भविष्य के लिए जोखिम मूल्यांकन के आधार पर लोन खातों को तीन हिस्सों में बांटा जाएगा। पहले स्टेज में ऐसे कहते होंगे, जो सामान्य है इन पर अगले 12 महीने के संभावित नुकसान का हिसाब लगाया जाएगा। वहीं दूसरे स्टेज उन खातों को शामिल किया जाएगा, जिनमें खतरे के संकेत मिल चुके हैं। अगर ग्राहक की हालत खराब दिखती है या भुगतान में कोई परेशानी है, तो बैंक को पूरे लोन कार्यालय के संभावित नुकसान का हिसाब रखना होगा। वहीं तीसरे स्टेज में सबसे गंभीर स्थिति वाले खातों को शामिल किया, इसके लिए लाइफटाइम नुकसान का प्रावधान बैंकों को करना होगा।
बॉरोअर लेवल क्लासिफिकेशन नियम के तहत अगर किसी ग्राहक का एक बड़ा लोन एनपीए की कैटेगरी में शामिल किया जाता है, तो उसके बाकी एक्स्पोज़र को भी नए तरीके से देखा जाए। बता दें इससे संबंधित ड्राफ्ट आरबीआई ने अक्टूबर 2025 में जारी किया गया था। इसके बाद बड़े बैंकों से सुझाव भी मांगे गए थे। अब अंतिम नियम घोषित कर दिया है।






