
RBI Action: 29 मई को रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने दो फाइनेंस कंपनियों और एक ऑथराइज्ड डीलर बैंक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। आरबीआई ने नियमों का उल्लंघन करने पर ईसीएल फाइनेंस लिमिटेड और एडलवाइस एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड पर प्रतिबंध लगाए हैं। वहीं ऑथराइज़्ड डीलर बैंक एचएसबीसी लिमिटेड पर 36.38 लाख रुपए का जुर्माना ठोका है।
फाइनेंस कंपनियों के इन सेवाओं पर लगा प्रतिबंध
ईसीएल फाइनेंस लिमिटेड को तत्काल प्रभाव से अपने सामान्य व्यवसाय के दौरान या खातों को बंद करने के अलावा अपने थोक जोखिमों के संबंध में कोई भी सरंचित लेनदेन करने से रोकना होगा। वहीं एडलवाइस एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड को प्रतिभूति रशीदों सहित आस्तियों के अधिग्रहण तथा मौजूदा SRs को वरिष्ठ तथा अधीनस्थ किस्तों में पुनर्गठन करने से रोकना होगा। निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
आरबीआई ने क्यों लगाया प्रतिबंध?
यह कार्रवाई पर्यवेक्षी जांच के दौरान देखी गई भौतिक चिताओं पर आधारित है। ईसीएल और EARCL दोनों में SRs का गलत मूल्यांकन देखा गया। इसके अलावा ईसीएल में पर्यवेक्षी टिप्पणियों में आहरण शक्तियों की गणना के लिए ऋणदाताओं को अपने पत्र का गलत विवरण प्रस्तुत किया। शेयरों बदले ऋण देने के लिए मूल मानदंडों का गैर अनुपालन किया। बड़े लोन को लेकर सूचना केंद्रीय भंडार प्रणाली को गलत रिपोर्टिंग दी और केवाईसी दिशा निर्देशों का अनुपालन करने में विफल रहा।
EARCL रिजर्व बैंक के पर्यवेक्षी पत्र को बोर्ड के समक्ष नहीं रख पाया। लोन के निपटान से संबंधित नियमों का पालन नहीं किया। ग्राहकों को गैर सार्वजनिक जानकारी को समूह संस्थाओं के साथ साझा भी किया। यह भी देखा गया कि उक्त कमियों को दूर करने के लिए इन कंपनियों ने सार्थक उपचारात्मक कार्रवाई करने के बजाय नियमों को दरकिनार करने के लिए नए तरीकों का इस्तेमाल भी किया। पिछले कुछ महीना में आरबीआई उक्त संस्थाओं के वरिष्ठ प्रबंधन और उनके वैधानिक लेखा परीक्षकों के साथ बातचीत कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई सार्थक सुधारात्मक कार्रवाई नहीं हुई है, इसलिए व्यावसायिक प्रतिबंध लगाने का निर्णय केंद्रीय बैंक द्वारा लिया गया है।
एचएसबीसी बैंक पर लगा लाखों का जुर्माना
रिजर्व बैंक में एचएसबीसी लिमिटेड पर 36,38,000 रुपए का जुर्माना लगाया है। यह कदम केन्द्रीय बैंक ने फेम 1999 की उदारीकृत प्रेषण योजना के तहत रिपोर्टिंग आवश्यकताओं पर आरबीआई के निर्देशों के उल्लंघन के लिए उठाया है। आरबीआई द्वारा बैंक को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया था। जिसके जवाब में बैंक ने लिखित जवाब दिया, मौखिक प्रस्तुतियां भी दी। मामले के तथ्यों और बैंक के जवाब पर विचार करने के बाद आरबीआई ने आरोप को प्रमाणित करते हुए जुर्माना लगाना उचित समझा। हालांकि इस कार्रवाई का असर ग्राहकों और बैंकों के बीच हुए लेनदेन या समझौते की वैधता पर नहीं पड़ेगा।
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