Saving Scheme: रोजाना 416 रुपये बचाकर बनाएं करोड़ों का फंड, ये सरकारी स्कीम करेगी मदद, जानें कैलकुलेशन

Saving Scheme: रोजाना 416 रुपये बचाकर बनाएं करोड़ों का फंड, ये सरकारी स्कीम करेगी मदद, जानें कैलकुलेशन

Saving Scheme: बचत हर किसी के लिए जरूरी होता है। व्यक्ति की आय और खर्च कितना भी हो लेकिन पैसे बचाने से एक मानसिक शांति मिलती है। सेविंग करने से जीवन की अनिश्चित और दर्भाग्यपूर्ण स्थितियों से निकलने में मदद मिलती है। सभी लोग किसी-न-किसी तरीके से बचत करते हैं, लेकिन यदि तरीका सही न हो अच्छा फंड बनाना मुश्किल होता है। यदि आप सेविंग स्कीम में निवेश की इच्छा रखते हैं तो यह खबर आपके काम आ सकती है। सरकारी की खास छोटी बचत योजनाओं में से एक “पब्लिक प्रोविडेंट फंड” है, जो देश में PPF के नाम से प्रचलित है। इस स्कीम के जरिए आप करोड़ों का फंड बना सकते हैं।

योजना के बारे में

कोई भी भारतीय नागरिक मात्र 500 रुपये में स्कीम के लिए अकाउंट खुलवा सकता है। योजना 15 वर्षों में मैच्योर होती है। इसे 5 साल आगे बढ़ाने की सुविधा भी मिलती है। निवेश की अधिकतम सीमा 1.5 लाख रुपये सलाना है। निवेशक 12 किस्तों में भी पैसे जमा कर सकते हैं। वर्तमान में योजना पर 7.1 फीसदी ब्याज मिल रहा है। खास बात यह है कि पीपीएफ की मैच्योरिटी राशि पर टैक्स छूट की सुविधा मिलती है।

करोड़ों का फंड जुटाने के लिए कैलकुलेशन

यदि कोई व्यक्ति 25 वर्षों तक सलाना 1.5 लाख यानि रोजाना 416 रुपये का निवेशक करता है तो 1 करोड़ रुपये का फंड जुटा सकता है। 25 साल बाद कुल जमारक्षी 37,50,000 रुपये होती है। वहीं 65,68,015 रुपये ब्याज मिलता है। इस हिसाब से कुल 1,03,08,015 करोड़ रुपये का रिटर्न मिलता है। नजदीकी डाकघर के ब्रांच में जाकर खाता खुलवा सकते हैं।

(Disclaimer: इस आलेख का उद्देश केवल जानकारी साझा करना है। MP Breaking News किसी भी स्कीम में निवेश की सलाह नहीं देता।)

Manisha Kumari Pandey
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पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey →
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