Success Story: 12वीं कक्षा में दो बार हुए मुरली डिवी फेल, कभी कमाते थे 250 रुपये मंथली, आज बनाई 1.3 लाख करोड़ों की कंपनी

Success Story: 12वीं कक्षा में दो बार हुए मुरली डिवी फेल, कभी कमाते थे 250 रुपये मंथली, आज बनाई 1.3 लाख करोड़ों की कंपनी

Success Story : क्या कभी यह कोई सोच सकता है कि पढ़ाई में कमजोर इंसान करोड़ों की कंपनी बन सकता है। वैसे तो नहीं, लेकिन मन में अगर जज्बा हो तो कोई भी चीज सफलता के रास्ते में बड़ा नहीं बन सकती। दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो मुश्किल घड़ी में निराश हो जाते हैं। कई बार ऐसी परिस्थितियों से परेशान होकर मौत का रास्ता भी चुन लेते हैं, लेकिन उनमें से कई ऐसे भी होते हैं जो विषम-से-विषम परिस्थितियों को भी हंस कर पार कर लेते हैं। जिनमें से एक मुरली डिवी भी है, जिन्होंने रिश्तेदारों के ताने सुनने के बाद भी आज करोड़ों की कंपनी बना ली है। उन्होंने कभी भी अपना हौसला टूटने नहीं दिया। आइए विस्तार से पढ़ते हैं मुरली डिवी की दिलचस्प सक्सेस स्टोरी…

आंध्र प्रदेश में हुआ जन्म

दरअसल, मुरली देवी का जन्म आंध्र प्रदेश के छोटे से गांव में हुआ था। उनके पिता एक कर्मचारी थे, जिन्हें बहुत ही कम वेतन मिलता था। इसी में उन्हें 14 लोगों की फैमिली को चलना पड़ता था जोकि बेहद मुश्किल था। घर में ऐसी स्थिति भी कई बार उत्पन्न हुई, जब परिवार को एक वक्त की रोटी ही नसीब हो पाती थी। बता दें कि बचपन से ही मुरली पढ़ाई में कुछ खास नहीं थे। एक समय था जब वह 12वीं कक्षा में 2 बार फेल हो गए थे। स्वाभाविक है इस दौरान उनका मनोबल बिल्कुल खत्म हो गया था। उन्हें ऐसा लगा था कि अब वह आगे जिंदगी में कुछ भी नहीं कर पाएंगे। जो थोड़ी बहुत हिम्मत बची थी, उसे दोस्तों और रिश्तेदारों ने ताने मार-मार कर खत्म कर दिया था। हालांकि, जिंदगी में कुछ-ना-कुछ तो करना ही था इसलिए उन्होंने बीफार्मा करने की ठाणी। जिसे करने के बाद उन्हें विदेश जाने का मौका मिल गया।

250 रुपये मंथली

काफी कड़ी मशक्कत के बाद 25 साल की उम्र में वह जेब में मात्र 500 रुपये लेकर अमेरिका पहुंचे। यहां उन्होंने फार्मासिस्ट की जॉब की, जहां उन्हें 250 रुपए सैलरी मिलती थी। इस कंपनी में काम करते-करते उन्होंने लगभग 54 लख रुपए जमा कर लिए। जब उन्हें इस फील्ड का अच्छा नॉलेज हो गया, तब वह अपने देश भारत लौट आए और उन्होंने खुद की कंपनी बनाने का एक ख्वाब देखा। शुरुआत में तो लोगों ने उन्हें काफी ताना भी मारा, लेकिन उन्होंने किसी की बात नहीं सुनी। बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद से उन्होंने साल 1984 में फार्मा सेक्टर में कदम रखा। इस दौरान सबसे पहले उन्होंने कलम अंजी रेड्डी से मुलाकात की। जिसके बाद उन्होंने डॉ. रेड्डीज लैब में 6 साल काम किया।

ऐसे बदली किस्मत

वहीं, साल 1990 में डिवीज लैबोरेटरीज (Divi’s Laboratories) लॉन्च की। यहां से उनकी किस्मत एकदम पलट गई। इसके 5 साल बाद यानी 1995 में मुरली ने अपनी पहली मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की जोकि वर्तमान में तेलंगाना में मौजूद है। इसके बाद, वह लगातार एक-से-बढ़कर-एक प्लांट लगाने लगे और इस तरह साल 2002 में उन्होंने दूसरी यूनिट शुरू कर दी। कंपनी ने ताबड़तोड़ सफलता हासिल की। मुरली की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं थी। जब उन्होंने गरीबी में अपने बचपन को बिताते हुए अपनी खुद की किस्मत को पूरी तरह से बदल डाला और आज वह बड़े-बड़े पूंजीपतियों की लिस्ट में शुमार है।

मुरली डिवी की नेट वर्थ

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2022 में कंपनी का टर्नओवर 88 बिलियन था। वहीं, मुरली के नेट वर्थ की बात करें, तो वह वर्तमान में 1.3 लाख करोड रुपए के कंपनी के मालिक हैं। इतने रुपए होने के बावजूद भी आज वह एक साधारण सी लाइफ जीते हैं। उन्होंने कई स्टार्टअप्स में अपने पैसे इन्वेस्ट किए हैं। इसके अलावा, वह अपनी कंपनी में जरूरतमंद लोगों को काम भी देते हैं। आज वह लाखों लोगों के लिए उदाहरण बन चुके हैं कि इंसान अगर कुछ ठान ले, तो वह उस पाकर ही मानता है। आज वह अपने सेक्टर में बड़ी-बड़ी कंपनियों को टक्कर देते है।

Sanjucta Pandit
लेखक के बारे में
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सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit →
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