लोन लेकर शुरू की डिटर्जेंट पाउडर बनाने की फैक्‍ट्री, आज बच्‍चे-बच्‍चे की जुबान पर है यह नाम, पढ़ें कर करसनभाई पटेल की Success Story

बचपन में उन्होंने आर्थिक तंगी से कारण होने वाली समस्याओं को नजदीक से देखा। इसलिए वह जिद और जुनून लेकर अपनी गरीबी को खत्म करने में लग गए।
लोन लेकर शुरू की डिटर्जेंट पाउडर बनाने की फैक्‍ट्री, आज बच्‍चे-बच्‍चे की जुबान पर है यह नाम, पढ़ें कर करसनभाई पटेल की Success Story

Success Story of Karsanbhai Patel : कहते हैं जब कोई मेहनत करने पर आ जाए, तो उसे सफलता पाने से कोई नहीं रोक सकता। हालांकि, इस रास्ते में बहुत से लोग नीचे गिराने वाले लोग तो बहुत मिलते हैं, लेकिन पूरी कायनात भी उन्हें सक्सेस करने में लग जाती है। कुछ लोगों को सफलता बहुत ही जल्दी हाथ लगती है, तो कुछ लोगों को अपना अंपायर खड़ा करने में सालों-साल लग जाता है। इनमें से कुछ ऐसे भी कंपनी होती हैं, जो कुछ समय के लिए आकर प्रॉफिट कमाते हैं, फिर धीरे-धीरे मार्केट से आउट हो जाते हैं। तो कुछ कंपनी ऐसी हैं, जो सालों से अपना विश्वास लोगों में मन में जमाने में सफल रही है। ऐसी ही एक कहानी आज हम आपको गरीब किसान परिवार में जन्में करसनभाई पटेल की बताएंगे, जिन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई रूपपुर से की थी।

छोड़ी सरकारी नौकरी

बचपन में उन्होंने आर्थिक तंगी से कारण होने वाली समस्याओं को नजदीक से देखा। इसलिए वह जिद और जुनून लेकर अपनी गरीबी को खत्म करने में लग गए। अपने जमाने में वह रसायन विज्ञान में ग्रेजुएशन करने के बाद सरकारी लैब में बतौर टेक्नीशियन की नौकरी शुरू की, लेकिन उन्हें कुछ और ही करना था। हालांकि, किसी गरीब परिवार के बच्चे को सरकारी नौकरी मिल जाए, तो उसे और कुछ नहीं चाहिए होता है, लेकिन करसनभाई बिल्कुल भी ऐसे नहीं थे। उन्हें अपने घर की आर्थिक स्थिति सही करने के लिए अधिक-से-अधिक पैसा कमाना था। इसलिए अचानक उन्होंने एक दिन नौकरी से इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण उन्हें घर वालों की डांट भी सुनाई पड़ी थी।

शुरू की डिटर्जेंट पाउडर बनाने की फैक्‍ट्री

काफी खरी-खोटी सुनने के बाद वह अपने 15000 का लोन लेकर अपने घर के पीछे डिटर्जेंट पाउडर बनाने की फैक्ट्री डाल दी। जिसे लोग आज निरमा डिटर्जेंट पाउडर के नाम से जानते हैं। बता दें कि इस बिजनेस की शुरुआत साल 1969 में की गई थी। काफी सोच विचार करने पर उन्हें इस बिजनेस का आइडिया आया था। दरअसल, इससे पहले लोग बहुत ही महंगे डिटर्जेंट पाउडर का इस्तेमाल करते थे। काफी कॉस्टली होने के कारण कुछ लोग इसे नहीं खरीद पाते थे। इसलिए बहुत ही काम और सस्ते दरों पर डिटर्जेंट पाउडर बनाने और बेचने की ठानी। केवल इतना ही नहीं, फैक्ट्री में डिटर्जेंट पाउडर बनाने के बाद वह इसे साइकिल पर रखकर घर-घर बेचने जाते थे। शुरुआती दिनों में निरमा पाउडर 13 रुपए किलोग्राम बिकता था। धीरे-धीरे यह लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बनता गया और यह छोटी सी कंपनी ने उनकी किस्मत बदल दी।

18000 वर्कर्स करते हैं काम

इसके बाद उन्होंने एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट किराए पर ली और प्रोडक्शन के लिए कुछ लेवल्स को हायर कर लिया। धीरे-धीरे निरमा केवल एक राज्य नहीं, बल्कि पूरे देश भर के घर-घर तक पहुंचने लगी। इस सफलता के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वह किसी की पहचान को मोहताज नहीं है। बता दें कि साल 2010 तक आते-आते निरमा कंपनी पूरे मार्केट पर कब्जा कर चुकी थी। इसका कारोबार इतना अधिक बढ़ा कि आज भी बच्चे-बच्चे इस कंपनी का नाम जानते हैं। वर्तमान में इस कंपनी में 18000 से अधिक वर्कर्स काम करते हैं।

कंपनी का टर्नओवर

मीडिया रिपोर्ट्स की मुताबिक, कंपनी का टर्नओवर 23000 करोड़ रुपए सालाना है। तो वहीं कंपनी की सालाना कमाई 7000 करोड़ रुपए से भी अधिक का है। बता दें कि इस कंपनी में अब सर्फ के अलावा साबुन, कॉस्मेटिक और पर्सनल केयर प्रोडक्ट भी तैयार किए जाते हैं। इसकी पूरे भारत में मार्केटिंग काफी अच्छी है। कंपनी ने बीते 3 दशकों में लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई है। हर किसी को कंपनी पर पूर्ण भरोसा है। बता दें कि आज भी इस कंपनी का सर्फ बहुत ही कम रेट में मिल जाता है। हालांकि, अब मार्केट में कंपनी को टक्कर देने वाले बहुत से डिटर्जेंट पाउडर आ चुके हैं, लेकिन फिर भी निरमा कंपनी ऊपर राज कर रही है।

Sanjucta Pandit
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सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit →
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