अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ताजा फैसलों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर की मजबूती के कारण भारतीय सराफा बाजार में सोना और चांदी के दामों में फिर हलचल देखी गई है। अमेरिका-ईरान तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है, जो 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है।कच्चा तेल महंगा होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो गया है।
कच्चे तेल की कीमत 125 डॉलर के पार जाने से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें व महंगाई बढ़ने के साथ विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बन सकता है। इसके अलावा ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकियों और अमेरिकी प्रतिबंधों ने तेल की सप्लाई पर संकट खड़ा कर दिया है। युद्ध की आहट और महंगाई के डर से शेयर बाजार में भी अस्थिरता का माहौल है। यदि अमेरिका की नाकेबंदी आगे भी जारी रहती है, तो वैश्विक स्तर पर आपूर्ति संकट और अधिक गहरा सकता है।
गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 4,550 डॉलर प्रति औंस और चांदी 73 डॉलर प्रति औंस के आसपास बनी हुई है। 30 अप्रैल 2026 को भारतीय सराफा बाजार में 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम की कीमत 1, 50,810 रुपये पर दर्ज की गई है। वहीं, 22 कैरेट सोने के 10 ग्राम का भाव 1,38,250 रुपये चल रहा है। चांदी के दाम 2, 50,000 लाख रुपए के आसपास ट्रेंड कर रहे हैं। इससे पहले बुधवार (29 अप्रैल 2026 ) को 24 कैरेट सोने का भाव 1,50,590 रुपये और चांदी का रेट 2,60,000 पर बंद हुआ था।
डॉलर इंडेक्स में मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय रुपया दबाव में है। डॉलर के मुकाबले रुपया 95.25 के स्तर तक कमजोर हुआ है, जिससे भारत के लिए आयात (विशेषकर तेल और सोना) महंगा हो गया है। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को 3.5% से 3.75% पर स्थिर रखा है। दरों में कोई बढ़ोतरी न होने से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ी है और निवेशकों का भरोसा भी।
विशेषज्ञों की माने तो जब तक युद्ध की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में सोने चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा । अगर सीजफायर की दिशा में प्रगति होती है, तो इसका असर सोने और तेल दोनों बाजारों पर दिख सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाएं या धीरे-धीरे निवेश करें। भारत में शादी के सीजन के बावजूद ऊंचे दामों पर सोना खरीदना ग्राहकों के सामने बड़ी चुनौती है। खास करके मिडिल क्लास लोग भारी गहनों के बजाय हल्के वजन वाली ज्वेलरी या पुराने सोने को बदलकर नए गहने लेने को प्राथमिकता दे रहे हैं। चांदी की कीमतों में गिरावट का कारण औद्योगिक मांग की कमी है।
ध्यान रखें इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी रेट में GST और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं होते, इसलिए अलग-अलग शहरों और शोरूम्स में अंतिम दाम अलग हो सकते हैं। सोना खरीदते समय BIS हॉलमार्क और HUID कोड की जांच अवश्य करें। यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है इसे निवेश की सलाह ना मानें। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी प्रकार के निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या बाजार विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।






