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बजट 2026-27: परंपरा से हटकर Part-B पर रहेगा फोकस, टैक्स के साथ अर्थव्यवस्था की नई दिशा का होगा ऐलान

Written by:Ankita Chourdia
Published:
आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 अपनी पारंपरिक बनावट से अलग हो सकता है। सरकार इस बार बजट भाषण के पार्ट-B पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकती है, जिसमें सिर्फ टैक्स घोषणाओं की बजाय अर्थव्यवस्था की भविष्य की दिशा और बड़े सुधारों का खाका पेश किया जा सकता है।
बजट 2026-27: परंपरा से हटकर Part-B पर रहेगा फोकस, टैक्स के साथ अर्थव्यवस्था की नई दिशा का होगा ऐलान

केंद्र सरकार आगामी बजट 2026-27 को एक नए अंदाज में पेश करने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार बजट भाषण की पारंपरिक बनावट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसमें पार्ट-B को पहले से कहीं ज्यादा अहमियत दी जा सकती है।

अब तक की परंपरा के अनुसार, बजट भाषण का पार्ट-A सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता रहा है। इसमें सरकार अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति, विभिन्न क्षेत्रों के लिए आवंटन और भविष्य की योजनाओं का एक विस्तृत खाका पेश करती थी। वहीं, पार्ट-B काफी हद तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर प्रस्तावों और अन्य तकनीकी घोषणाओं तक ही सीमित रहता था।

बदलाव के पीछे सरकार की सोच

जानकारी के अनुसार, इस बार सरकार पार्ट-B को केवल टैक्स तक सीमित नहीं रखेगी। इसके बजाय, इस हिस्से का उपयोग देश की अर्थव्यवस्था को भविष्य में किस दिशा में ले जाना है, इसका एक स्पष्ट रोडमैप पेश करने के लिए किया जा सकता है। सरकार का इरादा यह दिखाने का है कि देश में उत्पादन, व्यापार और निर्यात को कैसे बढ़ावा दिया जाएगा।

यह कदम वैश्विक आर्थिक मंदी और व्यापार से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए उठाया जा रहा है। सरकार चाहती है कि इन मुश्किलों के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहे और इसके लिए बड़े सुधारों पर जोर देना जरूरी है।

किन क्षेत्रों पर होगा खास ध्यान?

बजट में कई अहम सुधारों की घोषणा होने की उम्मीद है, जिनका मकसद कारोबार को आसान बनाना और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।

कारोबार में आसानी: नियमों को सरल बनाने और व्यापार में आने वाली बाधाओं को कम करने पर विशेष जोर दिया जा सकता है।

सीमा शुल्क में सुधार: आयात-निर्यात से जुड़े सीमा शुल्क के नियमों को और सरल बनाया जा सकता है, ताकि कारोबारियों को राहत मिले और व्यापार की प्रक्रिया तेज हो।

योजनाओं का एकीकरण: निर्यात और उद्योग से जुड़ी कई पुरानी योजनाओं को मिलाकर एक नई और अधिक स्पष्ट व्यवस्था बनाने पर भी विचार हो रहा है। इससे कंपनियों के लिए नियमों का पालन करना आसान होगा।

कुल मिलाकर, इस बार का बजट सिर्फ आय-व्यय के ब्योरे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश के लिए अगले कुछ वर्षों का आर्थिक दृष्टिकोण भी प्रस्तुत करेगा। हालांकि, इन बदलावों की असली तस्वीर बजट पेश होने के बाद ही साफ होगी।