केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज 1 फरवरी को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आम बजट पेश करेंगी। यह लगातार नौवीं बार होगा जब वह देश का बजट प्रस्तुत करेंगी। इस बार एक खास बात यह भी है कि बजट रविवार के दिन पेश किया जाएगा, जो एक अनूठा अवसर है।
यह बजट ऐसे समय में आ रहा है जब दुनिया के कई हिस्सों में तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर अनिश्चितता का माहौल है। इसका सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ रहा है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी चुनौतियां बढ़ी हैं। ऐसे में सरकार के लिए आर्थिक स्थिरता बनाए रखना पहली प्राथमिकता होगी।
पूंजीगत व्यय पर रह सकता है जोर
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए इस बजट में भी पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगी। रेलवे, बिजली, रक्षा, ऊर्जा और शहरी परिवहन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की घोषणा हो सकती है। इससे न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
क्या मध्यम वर्ग को मिलेगी टैक्स में राहत?
बजट से पहले सबसे ज्यादा चर्चा कर व्यवस्था को लेकर होती है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार कर व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है। हालांकि, सरकार मध्यम वर्ग को कुछ राहत देने के लिए आयकर में मामूली बदलावों पर विचार कर सकती है। वहीं, कॉर्पोरेट टैक्स की दरों में किसी बड़े फेरबदल की उम्मीद नहीं की जा रही है। पिछले बजट में भी जीएसटी और आयकर से जुड़े कुछ बदलाव किए गए थे।
रोजगार और छोटे उद्योगों पर फोकस
सरकार पर खपत बढ़ाने और रोजगार सृजन का काफी दबाव है। इसे देखते हुए बजट में छोटे और मझोले उद्योगों (MSME) को मजबूत करने के लिए विशेष कदमों का ऐलान हो सकता है। इसके अलावा, युवाओं के लिए कौशल विकास (Skill Development) और नौकरी के अवसर बढ़ाने से जुड़ी योजनाओं पर भी सरकार का जोर रहने की उम्मीद है।
इन सबके साथ, सरकार स्वच्छ ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी पर भी अपनी प्रतिबद्धता जारी रख सकती है। बजट में नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों के लिए समर्थन जारी रहने की पूरी संभावना है। कुल मिलाकर, बजट 2026-27 सरकार के लिए विकास, रोजगार और आर्थिक संतुलन के बीच तालमेल बिठाने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होगा।





