ज्रायादातर राज्यों में शासकीय विद्यालयों की स्थिति अच्छी नहीं होती। सही व्यवस्था न मिलने के कारण अभिभावकों को अपने बच्चों का दाखिला प्राइवेट स्कूलों में करवाना पड़ता है। जहां मोटी फीस भी लगती है। इस वजह से देश में दिन-प्रतिदिन शिक्षा महंगी होती जा रही है। कभी-कभी पेरेंट्स सही समय पर फीस का भुगतान नहीं कर पाते। अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां छात्रों को सही समय पर फीस न भरने के लिए सजा दी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं ऐसा करना गैर-कानूनी होता है। हमारा संविधान अभिभावक और विद्यार्थियों को कोई अधिकार देता। जिसके तहत वे ऐसी गतिविधियों के खिलाफ शिकायती भी दर्ज कर सकते हैं।
कोई भी स्कूल फीस न भरने पर सुनने के लिए छात्रों के साथ मानसिक उत्पीड़न नहीं कर सकता। उन्हें बार-बार सबसे सामने शर्मिंदा भी नहीं कर सकता है। परीक्षा से रोकना, उन्हें क्लास अटेंड न करने देना और रिजल्ट रोकने की अनुमति भी स्कूल प्रबंधन को नहीं होती। इसके बावजूद यदि कोई स्कूल ऐसा करता है, तो इसे बाल संरक्षण कानून और शिक्षा अधिकार अधिनियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
क्या हैं कानूनी अधिकार? (Legal Rights)
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21ए देश में 6 से 14 वर्ष के हर बच्चे को फ्री और अनिवार्य का अधिकार देता है। सभी सरकारी स्कूलों में इसका पालन होना जरूरी है। प्राइवेट स्कूलों भले ही मुफ़्त एजुकेशन न दें, लेकिन भी मानवधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकते। प्रत्येक स्टूडेंट को मानवीय गरिमा के साथ पढ़ाई करने का हक है। यदि फीस में देरी होती है, तो स्कूल अभिभावकों को नोटिस भेज सकते हैं। वैधानिक तरीके से फीस की वसूली कर सकते हैं। लेकिन इसके छात्रों को परेशान करने का हक उन्हें नहीं होता।
इसलिए यदि आपका भी बच्चा सीबीएसई, आईसीएसई या किसी अन्य राज्य शिक्षा बोर्ड में पड़ता है और ऐसे मामलों का शिकार होता है। तो इसकी शिकायत आप इन अधिकारों का इस्तेमाल करके शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं।
ऐसे करें शिकायत
- सीबीएसई बोर्ड से जुड़े छात्रों के अभिभावक सीवीओ के पास लेटर या ईमेल के जरिए शिकायत कर सकते हैं। ऑनलाइन समाधान पोर्टल पर भी शिकायत कर सकते हैं। ऑफिशियल वेबसाइट cbse.gov.in पर उपलब्ध हेल्पलाइन नंबर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। स्कूल का नाम, पता, छात्र का नाम, रोल नंबर, क्लास, तारीख, घटना इत्यादि की जानकारी सबूत के साथ पेश करनी होती है।
- एनसीपीसीआर यानि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पोर्टल https://ncpcr.gov.in/ पर जाकर भी शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।
- आप जिला शिक्षा अधिकारी या राज्य बाल अधिकार आयोग के पास भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
- मौलिक अधिकारों का हनन होने पर हाईकोर्ट में रिट याचिका भी दायर करवाई जा सकती है। सामूहिक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में PIL दर्ज करवा सकते हैं।
- बाल अधिकार का उल्लंघन होने पर मानसिक या प्रताड़न को लेकर बाल कल्याण समिति या जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में इस मामले की शिकायत कर सकते हैं।






