
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब कई ऑनलाइन कोर्स कॉलेज ऑफर नहीं कर पायेंगे। दरअसल, शिक्षा संस्थानों द्वारा ऑफर किए जाने वाले एमसीएएचपी एक्ट 2021 के तहत ओडीएल और ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। नए नियमों के तहत अब किसी भी कॉलेज या संस्थान को मनोविज्ञान सहित एमसीएएचपी अधिनियम 1921 में शामिल किसी भी संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम की पेशकश करने की अनुमति नहीं होगी। यह बदलाव शैक्षणिक क्षेत्र जुलाई-अगस्त 2025 से लागू होगा।
23 जुलाई 2025 को आयोजित 593वीं बैठक में एनसीएएचपी अधिनियम 2021 के अंतर्गत आने वाले स्वास्थ्य सेवा और संबद्ध विषयों में विशेषज्ञता के प्रोग्राम को ओडीएल और ऑनलाइन मोड में प्रस्तुत करने की सुविधा पर विचार-विमर्श किया गया। जिसके बाद आयोग नहीं है फैसला लिया कि ऐसे पाठ्यक्रमों को ऑनलाइन ऑफर नहीं किया जायेगा। इसकी सिफारिश अप्रैल 2025 में आयोजित कार्य समूह की बैठक के दौरान की गई थी, जिसे अब यूजीसी ने मंजूरी दे दी है।
अब ऑनलाइन नहीं मिलेंगे ये कोर्स
एनसीएएचपी एक्ट 2021 के तहत एलाइड इन हेल्थकेयर प्रोफेशन से संबंधित अलग-अलग पाठ्यक्रम संस्थान ऑफर करते हैं। जिसमें फिजियोथैरेपी, ऑप्टोमेट्री साइकोलॉजी, सूक्ष्म जीव विज्ञान, खाद्य और पोषण विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी और नैदानिक पोषण एवं आहार विज्ञान के विशेषज्ञता पाठ्यक्रम शामिल हैं। कई संस्थानों को ऐसे कोर्स ऑनलाइन और ओडीएल मोड में ऑफर करने की अनुमति आयोग ने दी थी, मंजूरी को वापस लिया गया है।
बैचलर ऑफ आर्ट्स में उन्हीं विषयों को ऑनलाइन ऑफर नहीं किया जाएगा, एनसीएएचपी अधिनियम 2021 के तहत आते हैं। इंग्लिश, हिंदी, पंजाबी, अर्थशास्त्र, इतिहास, गणित, लोक प्रशासन, दर्शनशास्त्र राजनीति, विज्ञान, सांख्यिकी, मानव अधिकार एवं कर्तव्य, संस्कृत, समाजशास्त्र कई कोर्स पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
कॉलेजों को दिए गए ये निर्देश
सभी उच्च शिक्षा संस्थानों पर यह नियम लागू होगा। विश्वविद्यालयों को यूजीसी ने निर्देश दिया है कि वे आगामी शैक्षणिक 2025-26 या इसके बाद इन कार्यक्रमों में किसी भी नए छात्र को एडमिशन न दें।

