हत्या के मामले में परिजनों संग पूर्व विधायक का धरना, टीआई लाइन अटैच

हत्या के मामले में परिजनों संग पूर्व विधायक का धरना, टीआई लाइन अटैच

छतरपुर, संजय अवस्थी

छतरपुर में आज हत्या के मामले में सही कारवाई न करने के आरोप मे मृतक के परिजन एस पी आँफिस मे धरने पर बैठ गये| धरने की खबर लगते ही एस पी सचिन शर्मा मौके पर पहुंचे और उनकी बात सुनकर कारवाई का उन्होने आश्वासन परिजनो को दिया| लेकिन बात एसपी के आश्वासन के बाद भी खत्म नही हुई| इस दौरान बीजेपी के पूर्व विधायक बिजय बहादुर सिंह आये और वह भी धरना दे रहे मृतक के परिजनो का समर्थन करते हुये धरना पर बैठ गये| मामला बिगडता देख एसपी ने तत्काल इस हत्याकांड की टीम गठित करते हुये विवादो मे रहने वाली गौरिहार थाना प्रभारी सरिता वर्मन लाईन अटैच कर दिया|

दर असल मामला कुछ दिन पहले गौरिहार थाने के रेवना गांव का है, जहां एक युवक की हत्या हुई थी, मृतक के परिजनों ने जिस पर हत्या का आरोप लगाया था ,उस पर कार्यवाही न करते हुये ,दूसरे पर हत्या की कार्यवाही कर दी, जिस पर मृतक के परिजनो ने टी आई पर लेन देन कर आरोपी को बचाने का आरोप लगाते हुए विरोध मे वह धरने पर बैठ गये।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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